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अपमान : यादव से ब्राह्मण बने रामदेव बोले, ‘OBC वाले ऐसी-तैसी कराएं’

रामदेव बाबा कह रहे हैं कि अब वो ब्राह्मण कुल के हैं और खुद को अग्निहोत्री से लेकर त्रिवेदी-चतुर्वेदी ब्राह्मण तक बता रहे हैं लेकिन खुलेआम ओबीसी समाज का अपमान भी कर रहे हैं।

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‘OBC अपनी ऐसी-तैसी कराए मैं तो अग्निहोत्री ब्राह्मण हूं।’  सबसे ज्यादा आबादी वाले OBC समाज का अपमान करने वाला ये बयान मेरा नहीं है बल्कि योग गुरु रामदेव बाबा का है इसलिए अगर ये सुनकर आपको गुस्सा आ रहा है तो कृपया मुझ पर भड़ास ना निकालें। कुछ कहना है तो सीधे रामदेव बाबा को कहिए क्योंकि जो रामदेव बाबा कल तक यादव समाज से आते थे और यादव लोग उन्हें यदुवंशी कहकर गर्व महसूस किया करते थे, वही रामदेव बाबा अब ब्राह्मण हो गए हैं। रामदेव बाबा ने अपनी जाति और कुल बदल लिया है। वो कह रहे हैं कि अब वो ब्राह्मण कुल के हैं और खुद को अग्निहोत्री से लेकर त्रिवेदी-चतुर्वेदी ब्राह्मण तक बता रहे हैं लेकिन उन्हें खुद को जो कहना है वो कह लें लेकिन दिक्कत ये है कि वो खुद को ब्राह्मण बताते-बताते खुलेआम ओबीसी समाज का अपमान भी कर रहे हैं।

 बाबा रामदेव ने क्या कहा ?

दरअसल सोशल मीडिया पर रामदेव का एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में रामदेव कहते हैं मेरा मूल गोत्र है ब्रह्म गोत्र। और मैं हूँ अग्निहोत्री। अग्निहोत्री ब्राह्मण हूँ मैं। बोलते हैं बाबा जी आप तो ओबीसी हो। OBC वाले ऐसी-तैसी कराएं। मैं हूँ अग्निहोत्री ब्राह्मण। मैं हूं वेदी ब्राह्मण। मैं हू द्विवेदी ब्राह्मण, मैं हूं त्रिवेदी ब्राह्मण और मैं हूं चतुर्वेदी ब्राह्मण। चार वेद मैंने पढ़े हैं। मैं हूँ ब्राह्मण क्योंकि अज्ञान को मिटाता हूँ। मैं हूँ क्षत्रिय क्योंकि सबका भय मिटाता हूँ। मैं हूँ वैश्य मैं सबका अभाव मिटाता हूँ और मैं हूँ शूद्र जो तुम्हारी वाणी-आचरण वग़ैरह की गंदगी दूर करता हूँ। इसलिए मैं महाशूद्र हूँ और महाब्राह्मण भी हूँ।’

क्या ब्राह्मण बन गए रामदेव ?

बाबा रामदेव कह रहे हैं कि क्योंकि वो हिंदू धर्म को मानते हैं, सनातनी परंपरा के हिसाब से पूजा पाठ करते हैं, वो गीता का पाठ करते हैं और उन्होंने चारों वेद भी पढ़ लिए हैं। उन्हें हिंदू धर्म शास्त्रों की अच्छी जानकारी है और वो हवन भी करते हैं इसलिए अब वो ब्राह्मण हो गए हैं। रामदेव जो कह रहे हैं वैसे ही कुछ-कुछ बातें अक्सर ब्राह्मणवादी भी कहते हैं। हिंदू धर्म को मानने वाले लोग अक्सर कहते हैं कि वेदों में जिन चार वर्णों का जिक्र है, वो इंसान के जन्म पर नहीं बल्कि कर्म पर आधारित है। यानी ऐसे लोग चतुर वर्ण व्यवस्था को जायज़ ठहराते हैं इसलिए रामदेव भी अब इसी परिभाषा के तहत खुद को ब्राह्मण घोषित कर रहे हैं।

क्या हिंदू धर्म में कोई अपनी जाति बदल सकता है?

ये ऐसा सवाल है जिसका जवाब सदियों से ढूंढा जा रहा है। ब्राह्मणवादी दावा तो करते हैं कि चतुर वर्ण इंसान के जन्म नहीं बल्कि कर्म के आधार पर बना था और लोगों के वर्ण उनके कर्मों के हिसाब से तय होते थे लेकिन भारतीय इतिहास में ऐसा कोई मामला दिखाई नहीं देता जहां किसी शूद्र, क्षत्रिय या वैश्य जाति के व्यक्ति को ब्राह्मण बनाया गया हो या फिर किसी ब्राह्मण को उसके बुरे कर्मों के कारण शूद्र बना दिया गया हो। यानी हिंदू धर्म में जाति व्यवस्था इतनी कठोर है कि इंसान मर जाता है लेकिन उसकी जाति नहीं बदलती।

बाबा साहब ने जाति-परिवर्तन पर क्या कहा ?

इस बारे में बाबा साहब डॉ आंबेडकर अपनी किताब जाति का विनाश में लिखते हैं हिंदू धर्म की चतुर वर्ण व्यवस्था एक चार मंज़िला इमारत की तरह है। इस इमारत में एक मंज़िल से दूसरी मंज़िल पर जाने के लिए कोई सीढ़ी नहीं है। जो जहां पैदा हुआ है, वो वहीं मरेगाबाबा साहब के कहने का यही मतलब है कि हिंदू धर्म में जाति परिवर्तन की कोई व्यवस्था नहीं है। आप अपना धर्म तो बदल सकते हैं लेकिन आप अपनी जाति नहीं बदल सकते। यहां ना कोई किसी जाति में जा सकता है और ना ही आ सकता… जाति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए एक ही जाति के लोगों को एक-दूसरे से शादी-ब्याह करके अपनी ही जाति की संतान का पैदा करना होता है। यानी आप जन्म से ही अपनी जाति पा सकते हैं, आपको बाद में मनचाही जाति चुनने का ऑप्शन नहीं मिलता। आप में चाहे जितने भी गुण हों, आप अपने गुणों के हिसाब से भी कोई वर्ण नहीं चुन सकते। 

तुलसीदास ने ब्राह्मण-शूद्रों पर क्या लिखा ?

मैं आपको उदाहरण देकर समझाता हूं। ब्राह्मण कवि तुलसीदास ने एक किताब लिखी है जिसका नाम है रामचरितमानस। इस किताब में शूद्रों, महिलाओं और कामगार जातियों के खिलाफ बहुत सी गलत बातें लिखी हुई हैं। उदाहरण के तौर पर देखिए ‘पूजिय बिप्र सकल गुणहीना। शूद्र न गुणगन ज्ञान प्रवीना।’ इस अंश में उद्धृत पहली चौपाई में कहा गया है कि ब्राह्मण गुणहीन भी हो, तो भी उसकी पूजा करनी चाहिए और शूद्र गुणवान और विद्वान हो तब भी उसकी पूजा नहीं करनी चाहिए। 

यानी तुलसीदास के मुताबिक रामदेव चाहें जितनी भी पूजा पाठ कर लें, वो कितना ही योग कर लें, हवन कर लें, वेद और शास्त्र पढ़ लें वो कभी ब्राह्मण नहीं बन सकते। अपने आप चाहे वो खुद को जो भी कह लें लेकिन उन्हें ब्राह्मण कभी अपनी जाति और कुल में शामिल नहीं करने वाले। ना ही हिंदू धर्म में कोई ऐसी विधि या पूजा-पाठ है जिसके जरिए किसी की जाति बदलवा सकें इसलिए रामदेव के कहने का कोई मोल नहीं। अगर कोई मोल है तो फिर ब्राह्मणों को चाहिए कि वो सभी यादवों को अब से ब्राह्मण मानना शुरू कर दें। 

क्या राम मंदिर में पुजारी बन सकते हैं रामदेव ?

रामदेव ने अपने आप को अग्निहोत्री ब्राह्मण घोषित कर दिया है तो क्या अब ब्राह्मण बनने के बाद रामदेव किसी मंदिर के पुजारी बन सकते हैं? क्या रामदेव को राम मंदिर का पुजारी बनाया जा सकता है? क्या रामदेव अब शंकराचार्य बन सकते हैं? क्या रामदेव अब जनम-मरण के दौरान अनुष्ठान करा सकते हैं? क्या रामदेव भी दक्षिणा ले सकते हैं? क्या रामदेव को ब्राह्मणों को मिलने वाले सभी विशेषाधिकार मिलेंगे? ये सवाल सिर्फ रामदेव के लिए ही नहीं बल्कि हिंदू धर्म की कथित ऊंची जातियों के लिए भी जिनका जवाब उन्हें ज़रूर देना चाहिए। 

रामदेव पर लगा ओबीसी के अपमान का आरोप 

वैसे इन सवालों का जवाब शायद किसी के पास ना हो लेकिन इतना तो साफ हो गया कि रामदेव ने खुद को ब्राह्मण घोषित करते हुए देश की बहुसंख्यक आबादी यानी ओबीसी का घोर अपमान किया है। वो कह रहे हैं कि ओबीसी अपनी ऐसी-तैसी कराएं। ओबीसी की आबादी हमारे देश में करीब 60 % है यानी ओबीसी की संख्या सबसे ज्यादा है लेकिन फिर भी रामदेव ओबीसी का अपमान कर रहे हैं। अपने कुल और वंश को ठुकरा रहे हैं तो क्या यादव समाज अब रामदेव का बहिष्कार करेगा? क्या यदुवंशियों के साथ-साथ संपूर्ण ओबीसी समाज और दलित-बहुजन समाज रामदेव के पतंजलि के उत्पाद खरीदना बंद कर देगा? इसका अंदाज़ा आप सोशल मीडिया पर चल रही बहस से लगा सकते हैं।

सोशल मीडिया पर रामदेव का जबरदस्त विरोध

ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रामदेव के खिलाफ हैशटैग चल रहे हैं और लोग रामदेव से माफी मांगने की मांग भी कर रहे हैं। मैं आपको कुछ ट्वीट्स पढ़ाता हूं। परमिंदर बरार लिखते हैं ‘इस हैशटैग का प्रयोग करें। OBC समाज को गाली देने वाला माफ़ी नहीं अगर नहीं मांगा तो इसको जेल भेजो।#बाबा_रामदेव_माफ़ी_मांगो’ 

जैकी यादव नाम के यूज़र रामदेव के सलवार-सूट वाली तस्वीरों को शेयर करते हुए लिखतें हैं अब अगर बाबा रामदेव अपने आप को यादव नहीं मानते तो इसमें कोई ताज़्जुब वाली बात नहीं है। यादव की एक खूबी है अंतिम समय तक रण में लड़ता है इसके इतिहास में सैकड़ों उदाहरण हैं जिसमें एक उदाहरण 1962 का रेजांगला युद्ध भी है। हमें तो उसी दिन रामदेव के यादव होने पर शक हो गया था जब यह रामलीला मैदान से लेडीज सलवार कुर्ता पहनकर भागे थे अगर यहां कोई यादव होता तो उसे सब स्वीकार होता मगर यह न करता। बाबा रामदेव की बात से हम सहमत हैं बस उन्हें OBC को भला बुरा नहीं कहना चाहिए था।

 

कुल मिलाकर सोशल मीडिया पर लोग रामदेव की क्लास लगा रहे हैं। कोई उनके कालेधन पर दिए गए पुराने बयानों की क्लिप लेकर आ रहा है तो कोई उनके रामलीला मैदान छोड़कर भागने की तस्वीरें शेयर कर रहा है। कोई रामदेव के पतंजलि प्रॉडक्ट्स के बहिष्कार की बात कर रहा है तो कोई रामदेव को ढोंगी कह रहा है। मामला बड़ा हो गया है और अब विवाद बढ़ने के बाद रामदेव भी बैकफुट पर नज़र आ रहे हैं। 

रामदेव ने विवाद पर क्या कहा ?

भारत स्वाभिमान, मुख्यालय हरिद्वार की ओर से रामदेव के लंबे वीडियो को शेयर करते हुए लिखा गया ‘पूरा वीडियो यह है, जो भारत को तोड़ना चाहते हैं, जातियों में बांटना चाहते हैं, अपनी रोटियाँ सेकना चाहते हैं, ऐसे षडयंत्रकारी लोग इस पूरी clip को ना चला कर केवल 20 सेकण्ड की clip से भ्रम फैलाना चाहते हैं, लोगों के बहकावे में ना आयें और जातियों के नाम पर देश तोड़ने वाले लोगों को माफ़ी माँगनी चाहिये, पूज्य स्वामी रामदेव जी तो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं ‘

 

अगर रामदेव अच्छा काम कर रहे हैं तो फिर ओबीसी को ये क्यों कहा कि ओबीसी ऐसी-तैसी कराएं। अगर रामदेव इतने ही सही हैं तो उन्होंने ब्राह्मण, ठाकुर और बनिया जातियों के बारे में यही शब्द इस्तेमाल क्यों नहीं किए? अगर रामदेव जाति और वर्णों से ऊपर उठ गए हैं तो फिर यही शब्द उनके मुंह से बाकी जातियों के लिए भी निकलने चाहिए थे लेकिन उन्होंने सिर्फ ओबीसी को ही इस तरह अपमानित किया। इसे लेकर ओबीसी समाज में जबरदस्त गुस्सा है और हो सकता है कि रामदेव के खिलाफ कोई बड़ा आंदोलन भी शुरू हो जाए। इस बारे में आपकी क्या राय है? कमेंट करके बताएं

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