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मोदी राज में SC-ST, OBC की No Entry क्यों? चौंकाने वाले आंकड़े क्या बताते हैं?

15 मार्च को शिक्षा मंत्री ने देश भर की सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ में SC-ST और OBC के खाली पड़े पदों के बारे में जानकारी दी है। ये आंकड़ें बताते हैं कि कैसे देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में दलितों-पिछड़ों और आदिवासियों की नौकरियां नहीं दी जा रही?

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16 अप्रैल 2014 को नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि ये दशक दलितों-पिछड़ों, शोषितों और आदिवासियों का होना वाला है। मोदी उस वक्त बीजेपी की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे और सबका साथ-सबका विकास का नारा दोहरा रहे थे। लेकिन 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के बाद वो देश के दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को भूल गए। कैसे? इसका जवाब ख़ुद मोदी सरकार के शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने संसद में दिया है।

उच्च शिक्षण संस्थानों में SC, OBC के आधे से ज्यादा पद खाली

15 मार्च को शिक्षा मंत्री ने देश भर की सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ में SC-ST और OBC के खाली पड़े पदों के बारे में जानकारी दी है। सरकार के मुताबिक देश भर की सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ में OBC के लिए आरक्षित फैकल्टी के आधे से ज्यादा पद खाली हैं, जबकि अनुसूचित जातियों और जनजातियों के लिए आरक्षित 40 फीसदी पद खाली पड़े हैं।

सरकार के मुताबिक देश भर की सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ में OBC के लिए आरक्षित फैकल्टी के आधे से ज्यादा पद खाली हैं।

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में वंचित तबके का प्रतिनिधित्व बहुत कम 

42 सेंट्रल यूनिवर्सिटी में OBC फैकल्टी के लिए आरक्षित 52 % पद खाली पड़े हैं। यानी OBC कैंडिडेट्स को आधे से ज्यादा नौकरियां नहीं दी गई हैं। जबकि अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 39 % पद खाली पड़े हैं। वहीं अनुसूचित जनजातियों के 42 % फीसदी पदों को अब तक नहीं भरा गया है।

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संस्कृत सेंट्रल यूनिवर्सिटी में OBC और ST के 13-13 % पद खाली पड़े हैं तो वहीं एससी के 12 % पद अभी भी रिक्त हैं।

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IGNOU में तो ओबीसी समुदाय के लोगों के लिए आरक्षित कुल सीटों में से 67 % आज तक नहीं भरी गई हैं। वहीं SC के 41 % और ST के 69 % पद खाली पड़े हैं।

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यही हाल IIT की नॉन फैकल्टी नौकरियों का भी है। OBC-42 %, SC-36 %, ST-47 % पद खाली हैं।

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भारतीय प्रबंधन संस्थानों यानी IIMs में तो हालात और भी ज्यादा खराब हैं IIMs में OBC और SC के करीब 60 फीसदी से ज्यादा आरक्षित पद खाली पड़े हैं तो वहीं ST के लिए आरक्षित लगभग 80 फीसदी पद नहीं भरे गए हैं मोदी सरकार को IIM का नाम Indian Institute of Management से बदलकर Indian Institute of Manuwadi कर देना चाहिए।

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IISC यानी Indian Institute of Science में भी ओबीसी का हाल बद से बदतर है। यहां OBC के लिए आरक्षित सीटों में से 90 % सीटें खाली पड़ी हुई हैं। IISC में SC-20 %, ST-55 फीसदी पद खाली पड़े हैं।

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इन आँकड़ों से ये बात तो साफ़ हो गई कि मोदी सरकार में कम से कम दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों का कोई विकास नहीं हो रहा है। क्योंकि अगर इन वर्गों का विकास होता तो 6 साल से सत्ता पर क़ाबिज़ पीएम मोदी के कार्यकाल में इन पदों के ख़ाली रहने का सवाल ही पैदा नहीं होता। ख़ुद को ओबीसी बताने वाले प्रधानमंत्री के कार्यकाल में OBC समाज का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।

प्रधानमंत्री जी, सिर्फ़ आरक्षण की दुहाई देने से काम नहीं चलता, आरक्षण की नीति को लागू भी करना पड़ता है। कम से कम जो पद स्वीकार कर लिए गए हैं, उनपर तो आपकी सरकार को नियुक्ति करनी चाहिए। कथनी और करनी में फ़र्क़ करना अच्छी बात नहीं। आपकी सरकार में सिर्फ़ चंद जातियों को भला हो रहा है और उसकी गवाही ये आँकड़े दे रहे हैं। प्राइवेटाइज़ेशन के ज़रिए आप पहले ही आरक्षण की व्यवस्था को ख़त्म करने का मुकम्मल इंतज़ाम कर रहे हैं लेकिन जो पद स्वीकार कर लिए गए हैं, उन्हें तो भर ही दो। बाक़ी लड़ाई बहुजन समाज लड़ लेगा।

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