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IIT खड़गपुर की द्रोणाचार्य : कब तक बहुजनों का अंगूठा काटते रहेंगे मनुवादी शिक्षक ?

देश के लिए इंजीनियर बनाने वाली IIT की एक महिला प्रोफेसर ने ऑनलाइन क्लास में ना सिर्फ दलितों-आदिवासियों और पिछड़े समाज से आने वाले छात्रों को गंदी-गंदी गालियां दी बल्कि फेल करने की धमकी तक दे डाली।

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द्रोणाचार्य का नाम सुना है आपने? महाभारत की कहानियों में ये एक ऐसा गुरु था जिसने एक आदिवासी छात्र एकलव्य का अंगूठा सिर्फ़ इसलिए कटवा दिया था क्योंकि वो उसके बाकी छात्रों से बेहतर धनुष चलाता था। ये कहानी तो सैंकड़ों साल पुरानी है लेकिन द्रोणाचार्य जैसे जातिवादी, मनुवादी और घटिया सोच वाले टीचर आज भी मौजूद हैं। ऐसा ही एक मामला IIT खड़गपुर में सामने आया है। देश के लिए इंजीनियर बनाने वाली IIT की एक महिला प्रोफेसर ने ऑनलाइन क्लास में ना सिर्फ दलितों-आदिवासियों और पिछड़े समाज से आने वाले छात्रों को गंदी-गंदी गालियां दी बल्कि फेल करने की धमकी तक दे डाली। 

(WhatsApp DP of Sima Singh)

नाम – सीमा सिंह

पद – एसोसिएट प्रोफ़ेसर, IIT खड़गपुर

 

इस मनुवादी और जातिवादी सोच वाली प्रोफेसर ने द्रोणाचार्य की तरह ही बहुजन छात्रों का भविष्य बर्बाद करना चाहा। जिस शिक्षक पर अपने छात्रों का हाथ पकड़कर आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी थी, वही मनुवादी टीचर इन छात्रों के अंगूठे ही नहीं बल्कि हाथ काट देना चाहती है।

सीमा सिंह IIT खड़गपुर में Humanities & Social Sciences पढ़ाती हैं। ये कोर्स खास तौर पर वंचित तबके से आने वाले छात्रों के लिए होता है ताकि उन्हें इंजीनियरिंग के साथ-साथ अन्य विषयों की जानकारी भी सके। इस क्लास में सिर्फ SC, ST, OBC और PwD यानी Person With Disabilities जैसे छात्र ही होते हैं। यानी मनुवादी प्रोफेसर सीमा सिंह ये पहले से जानती थी कि इस क्लास में सिर्फ इन्हीं जातियों के ही छात्र हैं। ऐसे में उसकी भाषा और गुस्सा देखकर तो यही लगता है कि उसने जानबूझकर इन छात्रों को टारगेट किया। यहां तक की उसने छात्रों को कम नंबर देकर फेल कर देने तक की धमकी दी। 

IIT जैसे बड़े संस्थानों तक पहुंचने वाले बहुजन छात्रों से जातिवादी टीचर कितनी नफरत करते हैं, इसका अंदाजा आप प्रो सीमा सिंह की भाषा को सुनकर लगा सकते हैं। इसी नफरत का शिकार होकर जाने कितने बहुजन छात्र या तो पढ़ाई छोड़ देते हैं या फिर सुसाइड जैसा खतरनाक कदम उठाने को मजबूर हो जाते हैं। प्रो सीमा सिंह जैसे लोगों के कारण ही हमने रोहित वेमुला को खोया था, प्रो सीमा सिंह जैसे लोगों के कारण ही डॉ पायल तड़वी ने अपनी जान दे दी और प्रो सीमा सिंह जैसे लोगों के कारण ही हर साल दर्जनों दलित-आदिवासी और पिछड़े समाज से आने वाले छात्र हार मान लेते हैं। प्रो सीमा सिंह जैसे द्रोणाचार्य टीचर बहुजन समाज के छात्रों को घेर-घेर कर उनके लिए ऐसा माहौल बना देते हैं कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। कुछ आंकड़े देखिए… 2007 से 2016 के बीच करीब 75,00 छात्रों ने अपनी जान दे दी थी। ज़बरदस्त एकेडेमिक प्रेशर और जातिवाद जैसी वजहों ने इन छात्रों का हौसला तोड़ दिया था। हर साल ऐसी तमाम खबरें आती हैं कि कैसे एक दलित छात्र ने खुद को फांसी लगा ली या फिर एक दलित छात्र हॉस्टल की छत से कूद गया। प्रो सीमा सिंह जैसे जातिवादी टीचर वंचित तबके से आने वाले पहली पीढ़ी के छात्रों के लिए द्रोणाचार्य साबित हो रहे हैं। 

IIT बॉम्बे के Ambedkar Periyar Phule Study Circle की ओर से शेयर की गई ये वीडियो क्लिप देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई। इंटरनेट पर जातिवादी सीमा सिंह के खिलाफ कार्रवाई की मांग होने लगी। #End_Casteism_In_IIT टॉप ट्रेंड में रहा। वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सी मंडल, मसान और गिली पुच्ची जैसी फिल्म बना चुके फिल्मकार नीरज घेवन, भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद, केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले समेत हज़ारों लोगों ने आरोपी टीचर पर सख्त कार्रवाई की मांग। विरोध बढ़ा तो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भी हरकत में आया। SC कमीशन के चेयरमैन विजय सांपला ने शिक्षा मंत्रालय और IIT खड़गपुर के डायरेक्टर विरेंद्र तिवारी को तुरंत जांच करने को कहा है। मतलब एक ठाकुर प्रोफेसर सीमा सिंह की जांच एक ब्राह्मण डायरेक्टर विरेंद्र तिवारी करेंगे… न्याय तो हो गया समझिए। क्योंकि IIT जैसे संसाथानों में बहुजन समाज से आने वाले टीचर ना के बराबर है। तमाम IITs के डायरेक्टर सवर्ण जातियों से हैं और इसीलिए प्रो सीमा सिंह जैसे लोगों को हिम्मत मिलती है कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। 

देश भर की तमाम IIT में फैकल्टी के कुल 8856 पदों में से 4876 सिर्फ सवर्ण जातियों के लोग हैं। OBC महज़ 329 हैं, अनुसूचित जाति के टीचर महज़ 149 और अनुसूचित जनजाति के महज़ 21 टीचर हैं। यानी देश भर की करीब 23 IIT में SC-ST, OBC जिनकी आबादी करीब 85 % है उनका प्रतिनिधित्व महज 9 फीसदी है। संवैधानिक आरक्षण के हिसाब से तो कम से कम इन IITs में SC-15 %, ST-7.5 % और OBC-27 % टीचर होने चाहिए। लेकिन मनुवादी आरक्षित पदों को भर्ते ही नहीं हैं, नियुक्तियां ही नहीं होती। वही हाल छात्रों का है, पहले तो इंटरव्यू में छात्रों के नंबर काटकर बाहर कर दो और फिर भी कोई छात्र क्लासरूम तक पहुंच जाए तो प्रो सीमा सिंह जैसे लोग उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने का कोई मौका नहीं छोड़ते। बहुजन समाज से ही आने वाली देश की जिस पहली महिला टीचर सावित्रीबाई फुले ने सीमा सिंह जैसी महिलाओं के लिए शिक्षा का रास्ता खोला, आज वही सीमा सिंह जैसी महिलाएं बहुजन समाज के छात्रों को यूं गालियां दे रही हैं। कोरोना काल में जब हमारा देश महामारी से लड़ रहा है, ऐसे मुश्किल दौर में भी जातिवादी लोग जातिवाद करने से बाज़ नहीं आ रहे। 

हमने प्रो सीमा सिंह का पक्ष भी जानना चाहा, हमने उन्हें WhatsApp पर मैसेज भेजकर अपना जवाब देने के लिए कहा लेकिन ये वीडियो बनाए जाने तक उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया।

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