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पत्रकारों की जासूसी करा रही मोदी सरकार, क्या प्रधानमंत्री को सवालों से डर लगता है ?

मानवाधिकार संगठन एम्नेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़ भारत सरकार हाई प्रोफ़ाइल पत्रकारों को टार्गेट कर रही है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद को हिंदू हृदय सम्राट बताते हैं और प्रचंड बहुमत की मज़बूत सरकार बनाने पर खूब इतराते भी हैं लेकिन क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्रकारों से डर लगता? क्या पीएम मोदी जर्नलिस्ट को देखकर घबरा जाते हैं? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि मोदी सरकार भारत के कई पत्रकारों की जासूसी करवा रही है। मानवाधिकार संगठन एम्नेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक़ भारत सरकार हाई प्रोफ़ाइल पत्रकारों को टार्गेट कर रही है।

पत्रकारों के फोन में डाला Pegasus Spyware 

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक़ मोदी सरकार ने हाल ही में कई बड़े पत्रकारों की जासूसी कराई। ख़बर के मुताबिक़ इज़राइल के बनाए पेगासस स्पाईवेयर की मदद से द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और द ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट के आनंद मांगले की जासूसी कराई गई। इसी साल अक्टूबर महीने में इन दोनों पत्रकारों के Iphone में Spyware डालकर इन्हें हैक किया गया और फिर इन दोनों की ही जासूसी की गई।

क्या है Pegasus Spyware ?

Pegasus एक ऐसा Spyware है जिसकी मदद से किसी के भी फोन में सेंध लगाई जा सकती है। ये फोन के मैसेज़ देख सकता है, ईमेल पढ़ सकता है, कॉल डिटेल्स देख सकता है, आपकी लोकेशन ट्रैक हो सकती है और यहां तक कि आपकी मर्ज़ी के बिना ये फोन के कैमरे से आपकी वीडियो भी बना सकता है। फोन हैंकिंग के मामले में Pegasus Spyware बहुत ही बदनाम है और इसे इज़रायल की NSO कंपनी ने बनाया है। इस कंपनी ने दुनिया भर की कई सरकारों को ये Spyware बेचा था। भारत में भी मोदी सरकार ने ये Spyware खरीदा और विपक्ष के नेताओं समेत कई विरोधियों के फोन की जासूसी की। 

2021 में पेगासस जासूसी कांड ने तूल पकड़ा था

अक्टूबर 2021 में आई रिपोर्ट के मुताबिक़ कथित तौर पर 300 से ज़्यादा हस्तियों की जासूसी की गई थी, उनके फ़ोन टैप किए गए थे। उनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, पूर्व इलेक्शन कमिश्नर अशोक लवासा जैसे लोग शामिल थे। तब संसद में इस पर खूब बवाल हुआ था, मामला बढ़ा तो सरकार ने जाँच कराने की बात कही। कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए और देश की सबसे बड़ी अदालत ने न्यायमूर्ति रवींद्रन आयोग की अगुवाई में एक जाँच कमेटी बनाई थी। बीजेपी ने कहा था कि ये जासूसी के आरोप झूठे हैं। 23 जुलाई 2021 को राहुल गांधी ने तो पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का इस्तीफ़ा तक माँग लिया था। 

हालांकि मामला आयोग, जाँच कमेटी और कोर्ट-कचहरी के बीच झूल रहा है लेकिन इसी दौरान जासूसी का खेल भी चल रहा है। मोदी सरकार पेगासस की मदद से अभी भी ऐसे लोगों के फ़ोन टैप करा रही है जिन्हें वो अपना आलोचक या विरोधी मानती है। 

अब यही सवाल उठता है कि आखिर पत्रकारों से इतना क्यों डरती है मोदी सरकार? अपने 10 साल के कार्यकाल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस ना करने वाले पीएम मोदी क्या यही चाहते हैं कि उनसे कोई भी सवाल ना पूछें। पत्रकार सवाल करें तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है और संसद में सांसद सवाल पूछें तो उन्हें सस्पेंड कर दिया जाता है। तो  क्या सरकार सवाल मुक्त पत्रकार और विपक्ष मुक्त संसद बनाना चाहती है?

पत्रकारिता के लिए खतरनाक देश क्यों बन रहा है भारत ?

भारत में पत्रकारिता वैसे भी ज्यादा नहीं बची है। मनु मीडिया के गोदी पत्रकार सरकार की चाटूकारिता करने में हर रोज़ नए-नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। जो बचे-खुचे पत्रकार हैं, उनपर सरकार की एजेंसियां छापे मार रही हैं। जिनपर छापे नहीं पड़ रहे, उनपर डिजिटल छापेमारी करके पेगासस जैसे Spyware उनके फोन में डाल दिए जा रहे हैं। भारत प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में से 161वें नंबर है। मोदी राज में लगातार देश प्रेस की आज़ादी के मामले में पिछड़ता जा रहा है। पत्रकारिता के मामले में पाकिस्तान से भी ज्यादा बुरा हाल भारत में… ​पाकिस्तान इस लिस्ट में 150वें नंबर पर है लेकिन हम मीडिया के लिए सबसे खतरनाक देश बनते जा रहे हैं। ऐसे में अब पत्रकारों की जासूसी के बाद ये नंबर और भी खिसक सकता है। आप जनता हैं, आपकी बात पीएम मोदी ज़रूर सुनेंगे। उनसे कहिए कि इतना डरना ठीक नहीं है। सवालों से डरना नहीं चाहिए बल्कि सवालों का सामना करना चाहिए। 

आपका इस बारे में क्या कहना है ? कमेंट करें और इसे बाकी लोगों के साथ शेयर करें।

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