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सिर्फ सवर्ण महिलाओं के लिए महिला आरक्षण बिल? SC-ST, OBC महिलाओं को कोटे के अंदर कोटा क्यों नहीं?

 देखिए हमारी AI एंकर प्रज्ञा के साथ महिला आरक्षण बिल पर स्पेशल रिपोर्ट 

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इस वक्त देश में महिला आरक्षण बिल लाया जा रहा है जिसमें महिलाओं के लिए 33 % सीटें आरक्षित करने का प्रावधान है लेकिन इस बिल में SC, ST और OBC महिलाओं के लिए कोटे के अंदर कोटा नहीं होगा। वंचित वर्गों की ओर से इसे सवर्ण महिला बिल कहा जा रहा है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में पेश

भारत के कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने देश के नए संसद भवन में चल रहे विशेष सत्र के दौरान Nari Shakti Vandan Adhiniyam पेश किया। लेकिन विडंबना देखिए एक दलित कानून मंत्री के हाथों एक ऐसा बिल पेश किया गया जिसमें दलित, आदिवासी और ओबीसी महिलाओं के लिए कोटे के अंदर कोटा नहीं दिया गया है।

SC-ST महिलाओं को पहले से आरक्षित सीटों में ही कोटा

SC-ST महिलाओं को पहले से ही आर्टिकल 330 और 332 में दलित-आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों के अंदर ही समेट दिया गया है, यानी जो सीटें अभी तक SC-ST के लिए आरक्षित थी, उसी के अंदर SC-ST की महिलाओं को भी 33 % आरक्षण मिलेगा जबकि नए 33 % महिला आरक्षण के अंदर अलग से उन्हें कोई कोटा नहीं दिया गया। खासकर ओबीसी महिलाओं के लिए तो इस बिल में कोई प्रावधान नहीं है। यानी खुद को ओबीसी मां का बेटा कहने वाले पीएम मोदी ने ओबीसी महिलाओं को संसद से बाहर रखने का हर मुमकिन प्रयास किया है।

मोदी सरकार के  Nari Shakti Vandan Adhiniyam में महिलाओं के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33 % सीटें आरक्षित रखने का प्रावधान है। The Constitution (128th Amendment) Bill, 2023 अगले 15 साल तक महिलाओं के लिए आरक्षण की बात करता है लेकिन संसद चाहे तो इसे आगे बढ़ा सकती है। लेकिन मोदी सरकार का ये बिल वंचित वर्गों की महिलाओं के हित में नहीं है। 

सवर्ण पुरुष की जगह सवर्ण महिला आने से क्या होगा ?

अगर किसी सवर्ण पुरुष की जगह किसी सवर्ण महिला को पद पर बैठा दिया जाए तो इससे दलित और वंचित वर्गों की महिलाओं की स्थिति में सुधार आने की कोई गारंटी नहीं होती। जिन तकलीफों से दलित-पिछड़ी महिलाएं गुजरती हैं, सवर्ण महिलाओं को उनका अंदाजा तक नहीं होता। सवर्ण महिलाएं तो सिर्फ जेंडर की मार झेलती हैं जबकि दलित महिलाओं को जेंडर और कास्ट दोनों की पीड़ा सहनी पड़ती है। 

एक महिला सिर्फ महिला नहीं होती

महिलाओं की भी जाति होती है। उसकी जाति की वजह से उसके साथ तमाम तरह के भेदभाव होते हैं। जब एक दलित महिला खेत में काम करने जाती है तो उसके साथ यौन हिंसा होने की संभावना ज्यादा है क्योंकि उसे महिला होने के साथ-साथ जाति की मार भी झेलनी पड़ती है इसलिए सारी महिलाओं का दुख एक जैसा नहीं होता। 

इसीलिए जब भी महिला आरक्षण बिल की बात उठती, वंचित वर्गों से आने वाले नेता संसद में Quota Within Quota की मांग करते थे। इसलिए ये बिल पास नहीं हो पाया था लेकिन मोदी सरकार के पास संसद में पर्याप्त वोट हैं और कई पार्टियां SC-ST, OBC महिलाओं को कोटे के अंदर कोटा दिए बगैर भी इस बिल का समर्थन करने का एलान कर चुकी हैं। बसपा अध्यक्ष मायावती ने भी कोटे के अंदर कोटे की मांग की लेकिन महिलाओं के हित में प्रावधान नहीं होने पर भी बसपा इस बिल का समर्थन करेगी। 

कांग्रेस ने भी की कोटे के अंदर कोटे की मांग

संसद में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी कोटे के अंदर कोटे की बात की लेकिन जब कांग्रेस खुद ये बिल लेकर आई थी, तब कांग्रेस ने दलित-वंचित वर्गों की महिलाओं के लिए आरक्षण नहीं दिया था। यानी एक तरह से बीजेपी और कांग्रेस के महिला आरक्षण विधेयक में कोई अंतर नहीं है। हालांकि ये अच्छी बात है कि अब कांग्रेस खुद ही इस बिल में वंचित वर्गों की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण देने का समर्थन कर रही है। वहीं बीजेपी कह रही है कि महिला तो महिला होती है, एक महिला और दूसरी महिला में कोई अंतर नहीं होता इसलिए इस बिल में कुछ भी गलत नहीं है। 

भारत में जाति सबसे बड़ी चीज़ है

भारत एक जाति प्रधान देश है और यहां बहुत सी चीज़ें जाति के हिसाब से ही तय होती है। महिलाओं की भी जाति होती है। कुछ महिलाओं के लिए उनकी जाति कई तरह के प्रिविलेज लाती है तो कई महिलाओं के लिए उनकी जाति एक समस्या बन जाती है। 

दलित महिलाएं 14 साल पहले मर जाती हैं

दलित-आदिवासी महिलाएं सवर्ण महिलाओं की तुलना में औसतन 14 साल पहले मर जाती हैं क्योंकि उन्हें ना सही से पोषण मिल पाता है और ना आराम, वो ज्यादा मेहनत का काम करती हैं, उनके पास सैनिटेशन की पर्याप्त सुविधा नहीं होती, प्रसूति की सुविधा नहीं होती जबकि सवर्ण महिलाओं के पास कई तरह के जातीय विशेषाधिकार होते हैं इसलिए महिला आरक्षण में SC-ST, OBC महिलाओं के लिए #Quota_Within_Quota होना ही चाहिए वरना ये बिल सिर्फ सवर्ण महिला आरक्षण का बिल है जिससे वंचित वर्गों की महिलाओं को कोई फायदा नहीं होगा। 

अगर मोदी सरकार वाकई में हर तबके की महिलाओं को सशक्त करना चाहती है तो उसे महिला आरक्षण बिल में वंचित वर्गों की महिलाओं को अलग से आरक्षण देना ही चाहिए। इस बारे में आपकी क्या राय है? कमेंट में अपनी राय लिखें, वीडियो को शेयर करें और द न्यूज़बीक को Subscribe करना ना भूलें। हमारी AI एंकर प्रज्ञा के साथ स्पेशल वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। 

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