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बिहार : अंडे का पैसा मांगने पर जातिवादियों ने दलित परिवार को पीटा, बजरंग दल ने भी धमकाया !

परिवार का कहना है कि गाँव के जातिवादी गुंडे और बजरंग दल के लोग बार-बार उनके घर आकर धमकियाँ दे रहे हैं कि अगर केस दर्ज कराया तो किसी को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे।

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रोहतास का पीड़ित परिवार (www.theshudra.com)

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परेशान कर देने वाली ये तस्वीरें बिहार के रोहतास ज़िले के करमा गाँव से आई हैं। इस गाँव के जातिवादियों का क़हर एक दलित परिवार पर ऐसा टूटा कि बुजुर्ग से लेकर छोटी बच्ची तक… सभी को गंभीर चोट आई हैं। आरोप है कि करमा गाँव के इकलौते दलित परिवार को जातिवादी गुंडों ने ना सिर्फ़ बेरहमी से पीटा बल्कि परिवार की बच्चियों के साथ बदसलूकी भी की। लेकिन ना ही गाँव वाले पीड़ित परिवार की कोई मदद कर रहे हैं और ना ही बिहार पुलिस की कान पर जूं रेंग रही है। परिवार का कहना है कि गाँव के जातिवादी गुंडे और बजरंग दल के लोग बार-बार उनके घर आकर धमकियाँ दे रहे हैं कि अगर केस दर्ज कराया तो किसी को ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे।

क्यों हुआ विवाद ?

दरअसल करमा गाँव के संजीव कुमार कोरोना काल में अपने परिवार का पेट पालने के लिए अंडे की रेहड़ी लगाते हैं। परिवार की ओर से हमें बताया गया है कि 7 जून को शराब के नशे में धुत गाँव के ही हरिनिवास सिंह ने पहले अंडे खाए और जब संजीव ने पैसे माँगे तो उसके साथ मारपीट शुरू कर दी और जातिसूचक गालियाँ दीं। आरोप है कि इस दौरान बीच बचाव करने आए संजीव के बुजुर्ग पिता और मासूम बच्ची के सिर पर भी लाठी-डंडों से वार किए गए जिसके कारण उन्हें गंभीर चोट आई है। आरोप है कि जातिवादी हरिनिवास के साथ शंकर सिंह, कृष्णा सिंह, अरविंद सिंह, शंकर सिंह, संतोष सिंह, शशिकांत कुमार, रवि कुमार और रंजित कुमार के साथ उनकी जाति के और भी लोगों ने दलित परिवार के सदस्यों को बेरहमी से पीटा और जान से मार देने की धमकी भी दी।

बजरंग दल दे रहा है धमकियां – पीड़ित 

पीड़ित परिवार जब थाने पहुँचा तो पुलिस ने कह दिया कि पहले जाकर ख़ुद ही अपनी मरहम पट्टी कराओ और कल आना, लेकिन बार-बार थाने के चक्कर काटने के बाद भी पुलिस ने अभी तक FIR दर्ज नहीं की है। पीड़ित परिवार के राहुल ने हमें बताया कि बजरंग दल के लोग उन्हें धमकियाँ दे रहे हैं। 

SC-ST थाने में भी नहीं सुनी गई फरियाद 

राहुल के पिता थाना डेहरी ऑन सोन की SC-ST सेल में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन हैरानी की बात है कि दलितों के लिए बनाए गए स्पेशल थाने भी उनकी फ़रियाद नहीं सुन रहे। हमने थाने के एसएचओ से लेकर एसपी तक कई अफ़सरों को कॉल किया लेकिन सभी के नंबर बंद मिले। 

पुलिस पर जातीय भेदभाव करने का आरोप 

पीड़ित परिवार ने हमें एक और वीडियो क्लिप मुहैया कराई जिसमें कुछ पुलिस वाले परिवार के साथ मारपीट करते हुए नज़र आ रहे हैं। परिवार का कहना है कि इससे पहले भी आरोपियों ने उनपर कई बार हमले किए हैं लेकिन जब भी पुलिस के पास जाते हैं तो पुलिस हमें ही मारने लगती है। पुलिस वाले भी आरोपियों की जाति के हैं और आरोप है कि वो अपनी ड्यूटी करने की जगह अपनी जाति के लोगों को बचाते हैं। 

पीड़ित परिवार को तुरंत सुरक्षा मिले

पीड़ित परिवार बेहद डरा हुआ है, गाँव के इकलौते दलित परिवार को अपनी सुरक्षा का डर सता रहा है लेकिन नीतीश कुमार के राज में बिहार पुलिस एक दलित परिवार की शिकायत तक नहीं सुनना चाहती। द न्यूज़बीक माँग करता है कि इस मामले में तुरंत SC-ST एक्ट की धाराओं के तहत केस दर्ज हो और पीड़ित परिवार को पुलिस प्रोटेक्शन दी जाए। 

ब्यूरो रिपोर्ट, द न्यूज़बीक 

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