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‘तुम किस एंगल से दलित लगते हो’ वाली जातिवादी कुंठा से कब बाहर निकलेंगे सवर्ण-ब्राह्मणवादी फिल्म निर्माता ?

तुम किस एंगल से दलित लगते हो? ये वो सवाल है जो अक्सर खुद को प्रगतिशील कहने वाले सवर्ण-ब्राह्मणवादी पढ़े-लिखे, अच्छे ब्रांडेड कपड़े पहनने वाले और महंगा फोन रखने वाले दलितों से पूछते हैं।

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(Poster Courtesy@RichaChadha)

तुम किस एंगल से दलित लगते हो? ये वो सवाल है जो अक्सर खुद को प्रगतिशील कहने वाले सवर्ण-ब्राह्मणवादी पढ़े-लिखे, अच्छे ब्रांडेड कपड़े पहनने वाले और महंगा फोन रखने वाले दलितों से पूछते हैं। इन लोगों को साफ-सुथरे और वेल ड्रेस्ड दलित शायद अच्छे नहीं लगते। इन्हें वैसे दलित अच्छे लगते हैं जिनके कपड़े फटे हों, पेट भूख के मारे कमर में घुस गया और वो हाथ जोड़कर दीन-हीन स्थिति में उनके सामने खड़े हों। इस तरह की सोच को अंग्रेज़ी में स्टीरियोटाइप यानी ‘एक खास गढ़ी हुई छवि’ कहते हैं। दलितों के प्रति पूर्वाग्रह रखकर बनाई गई ऐसी ही छवि दिखी फिल्म ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ के पोस्टर पर।

‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ के पोस्टर पर विवाद

‘मैडम चीफ मिनिस्टर’ के पोस्टर में एक दलित महिला को हाथ में झाड़ू लिए दिखाया गया है। कहा जा रहा है कि ये फिल्म बीएसपी सुप्रीमो मायावती के किरदार से प्रेरित है। लेकिन सवाल उठता है कि सवर्ण फिल्म मेकर हमेशा दलितों की ऐसी ही छवि को क्यों पर्दे पर दिखाते हैं? उन्हें क्यों पा रंजीत की फिल्म ‘काला’ के नायक की तरह आत्मसम्मान से भरे नायक-नायिकाएं नहीं चाहिए? देखिए कैसे लोग सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर ब्राह्मणवादी फिल्म मेकर्स की आलोचना कर रहे हैं और जातीय कुंठा पर प्रहार कर रहे हैं?

 

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1 COMMENT

  1. ये इक बड़ी बात है अब दलितों पर भी उनके दिर्ड इरादे को फ़िल्मी दुनिया के माधियम से अवगत करा रहे हैं

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