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प्रो दिलीप मंडल ने अखिलेश यादव पर क्यों कहा ‘जो सड़क के बीच में खड़े होते हैं, कुचले जाते हैं’ ?

पहले से ही बाबा साहब की जयंती पर भीम दिवाली मनाने का एलान कर चुके अखिलेश यादव अब तमाम हिंदू धर्मगुरुओं के सामने चरणवंदना करते नज़र आ रहे हैं, ऐसे में सोशल मीडिया पर इसे लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। 

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(Photo-yadavakhilesh)

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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती की मुलाक़ात की इन तस्वीरों पर विवाद हो गया है। लोहिया के आदर्शों पर चलने का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी के मुखिया का यूँ एक हिंदू धर्म गुरु के चरणों में झुकना बहुत से लोगों को रास नहीं आ रहा। लोग अखिलेश के इस कदम की आलोचना भी कर रहे हैं। पहले से ही बाबा साहब की जयंती पर भीम दिवाली मनाने का एलान कर चुके अखिलेश यादव अब तमाम हिंदू धर्मगुरुओं के सामने चरणवंदना करते नज़र आ रहे हैं, ऐसे में सोशल मीडिया पर इसे लेकर मिलीजुली प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। 

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सी मंडल ने इन तस्वीरों को अपनी फ़ेसबुक वॉल पर शेयर करते हुए बेहद गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने अखिलेश की तुलना मुलायम सिंह यादव से करते हुए उस वाक़ये को भी याद किया जब मुलायम सिंह यादव ने इन्हीं शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को गिरफ्तार करवा दिया था। दिलीप मंडल ने इस बारे में लिखा ‘ सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव तीन बार यूपी के मुख्यमंत्री रहे। देश के रक्षा मंत्री रहे। प्रधानमंत्री की कुर्सी के क़रीब पहुँचे। वे कभी किसी बाबा के पैरों के नीचे नहीं बैठे। हमेशा बराबरी पर बैठे। Akhilesh Yadav के सलाहकारों को सोचना चाहिए कि ये कैसी इमेज बन रही है! 

जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने बनारस में 201 ब्राह्मणों के पैर धोकर चरणामृत पीया था तो लोहिया ने उसेअश्लील हरकतकहा था। हमारे दौर के नेता वैचारिक रूप से इतने कमज़ोर कैसे हो गए? इतने सारे बाबाओं में से भी अखिलेश यादव ने इनके ही पैरों के नीचे बैठना पसंद किया? ये तो भयंकर रूप से राजनीति बयानबाज़ी करने वाले बाबा हैं। इनके बयानों में कौन सा आध्यात्म है?

आज Akhilesh Yadav जिस शंकराचार्य स्वरूपानन्द के पैर पकड़ रहे हैं, उन्हें मुख्यमंत्री मुलायम सिंह जी ने 7 मई, 1990 को आज़मगढ़ में गिरफ़्तार करवाया था। पूरा यूपी शांत रहा। केंद्र में वीपी सिंह की सरकार थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार के साथ मिलकर पक्का बंदोबस्त किया था। स्वरूपानन्द अयोध्या में जबरन शिलान्यास करने जा रहे थे। ऐसा करना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन होता। मुलायम सिंह इसके बाद भी मुख्यमंत्री और देश के रक्षा मंत्री बने। उसी पार्टी की विरासत अखिलेश जी को मिली है। लाइन सीधी होनी चाहिए।

7 मई, 1990 को मुलायम सिंह जी ने शंकराचार्य को अरेस्ट किया। इसी साल 24 अक्टूबर को लालू जी ने आडवाणी को क़ैद किया। अगले 25 साल तक ये दोनों नेता राज्य और केंद्र में छाए रहे। दोनों ही प्रधानमंत्री की कुर्सी के बेहद क़रीब तक पहुँचे। कई बार मुख्यमंत्री बने। ज़्यादातर हिंदुओं ने इनको वोट दिया। ये पोस्ट Akhilesh Yadav जी के लिए है।
बीच सड़क पर खड़े लोग कुचले जाते हैं।’

दिलीप मंडल ने उन खबरों के स्क्रीनशॉट भी साझा किए जिनमें यही शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की बात करते हैं। ये वही शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती हैं जो कहते हैं कि एससी-एसटी एक्ट से समाज टूट जाएगा। अब आप ही बताइए जो आदमी बहुजन समाज के फ़ायदे के लिए बनी व्यवस्थाओं को ही ख़त्म करने की वकालत करता है, उसके चरणों में एक बहुजन नेता का यूँ हाथ जोड़कर बैठ जाना क्या संदेश देता है?

इस बारे में मंडल आर्मी नाम के हैंडल से लिखा गया ‘जिसके चरणों में अखिलेश यादव पड़े हैं यह बही पोथीराम उपाध्याय उर्फ स्वरूपानंद सरस्वती है जिसने अहीरों को गैर हिन्दू , दंगाई घोषित किया था. तो क्या अखिलेश जी पोथीराम उपाध्याय के चरणों में लोट कर हिन्दू होने का सर्टिफिकेट लेने गए थे?

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ब्यूरो रिपोर्ट, द न्यूज़बीक 

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