Home वीडियो मायावती के सबसे बड़े फैन यशपाल गौतम का कोरोना से निधन !

मायावती के सबसे बड़े फैन यशपाल गौतम का कोरोना से निधन !

बसपा की रैलियों में लकड़ी के भारी-भरकम कट आउट अपने सिर पर घंटों उठाए यशपाल गौतम को बहुजन समाज का बच्चा-बच्चा जानता था।

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अगर आप बहुजन समाज पार्टी के समर्थक हैं या बीएसपी की रैलियों पर नज़र रखते हैं तो आपने भी ये तस्वीर ज़रूर देखी होगी। बीएसपी अध्यक्ष मायावती की हर रैली में मायावती को कभी लाल क़िले के सामने तो कभी संसद भवन के सामने बतौर प्रधानमंत्री पेश करने वाले इस कटआउट को ये शख़्स घटों सिर पर उठाए रहता। जज़्बा ऐसा कि ना धूप देखते और ना ही छाँव…बीएसपी की रैलियों की पहचान बन चुके इस शख़्स का नाम था यशपाल गौतम… BSP के समर्पित प्रचारक यशपाल गौतम का आज निधन हो गया।

कोरोना काल में आज तड़के एक ऐसी खबर आई जिसने बहुजन समाज पार्टी समर्थकों को झकझोर कर रख दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में रहने वाले बसपा के सबसे लोकप्रिय और कर्मठ समर्थक यशपाल गौतम का कोरोना की वजह से आकस्मिक निधन हो गया। बसपा की रैलियों में लकड़ी के भारीभरकम कट आउट अपने सिर पर घंटों उठाए यशपाल गौतम को बहुजन समाज का बच्चाबच्चा जानता था। इस चौंकाने वाली दुखद खबर के बाद सोशल मीडिया पर यशपाल के चाहने वालों की पोस्ट का तांता लग गया। हर कोई अपने अपने तरीके से यशपाल गौतम को श्रद्धांजलि देकर अपना दुख प्रकट करने लगा। 

(Photo-Social Media)

आर्थिक तंगी के बावजूद बीएसपी का प्रचार नहीं छोड़ा

यशपाल गौतम हापुड़ के एक सामान्य अंबेडकरवादी परिवार से संबंध रखते थे और अपनी रोजीरोटी चलाने के लिए बढ़ई का काम करते थे। 1991 में अपने पिता के निधन के बाद से ही यशपाल गौतम के ऊपर अपने पूरे परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी आन पड़ी। आर्थिक तंगी और चुनौती के बावजूद भी यशपाल गौतम ने अपने अंदर बाबा साहब के आंदोलन की समझ पैदा की और अपने सीमित संसाधनों के बावजूद वह बसपा के समर्थन में रैलियों में जाने लगे। अपने अनोखे अंदाज और सर पर उठाए कटआउट की वजह से यशपाल धीरेधीरे प्रिंट मीडिया की नजरों में आने लगे और उनकी फोटो बड़े बड़े अखबारों में छपने लगीं। देखते ही देखते यशपाल गौतम बसपा समर्थकों में खासे लोकप्रिय हो गए और रैली में पहुंचते ही उन्हें जनता और स्थानीय मीडिया ने घेर लिया करती।

लॉकडाउन में घर चलाने के लिए फलों की रेहड़ी लगाई

स्वाभिमानी यशपाल गौतम ने कभी अपनी परिस्थितियों से समझौता नहीं किया। कोरोना लॉकडाउन में रोजगार और आय के साधन खत्म होने पर उन्होंने अपने घर के सामने नवीन मंडी में फलों की रेहडी लगा ली ताकि उनके परिवार को किसी आर्थिक चुनौती का सामना ना करना पड़े। यशपाल के परिवार में उनकी बुजुर्ग माताजी पत्नी और तीन बेटियां हैं। संघर्ष के शुरुआती दिनों में यशपाल गौतम के पास जब बसपा की रैलियों में कट आउट बनाने के पैसे नहीं होते थे तब वह गुल्लक में थोड़े थोड़े पैसे जुटाकर अगली रैली तक पैसों का इंतजाम करते थे।

तीन बेटियों का भविष्य कौन सुधारेगा ?

किसी भी सामाजिक आंदोलन या राजनीतिक पार्टी के लिए यशपाल जैसे समर्थक बेहद अहम भूमिका निभाते हैं और अपने संगठन या राजनीतिक दल को आगे बढ़ता देखने के लिए अपना पूरा जीवन कुर्बान कर देते हैं। सोशल मीडिया पर जहां यशपाल के यू अचानक चले जाने से उनके मित्र और समर्थक स्तब्ध हैं वहीं उन्हें यह चिंता भी सता रही है कि परिवार का भरण पोषण कैसे होगा और तीन बेटियों की भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा।

अपना समस्त जीवन और संसाधन बहुजन समाज पार्टी के लिए न्यौछावर कर देने वाले निस्वार्थ समर्थक यशपाल गौतम की मदद के लिए नात शरीफ बसपा समर्थकों बल्कि बहुजन समाज के समस्त लोगों को और विशेषकर बसपा के बड़े पदाधिकारियों विधायकों सांसदों को आगे आना चाहिए ताकि सामाजिक आंदोलनों के ऐसे योद्धाओं को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सके।

(DNN हिंदी के संपादक वैभव कुमार का लेख)

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