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एक मंच पर आए 100 बहुजन यूट्यूबर, बहुजन मीडिया के लिए ‘एक नए युग की शुरुआत हुई’

लगातार दूसरे साल ऑल इंडिया बहुजन Youtubers Meet 2021 का सफल आयोजन रहा। इतिहास में पहली बार 100 बहुजन Youtubers एक मंच पर आए और बहुजन मीडिया को मज़बूत बनाने पर वैचारिक और तकनीकी ट्रेनिंग में हिस्सा लिया।

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डिजिटल युग में बहुजन समाज ने तकनीक को हथियार बना लिया है और सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बहुजन मीडिया खड़ा करने के लिए कर रहे हैं, यूट्यूब चैनलों के ज़रिए मनुवादी मीडिया के समानांतर बहुजन मीडिया खड़ा हो रहा। इसलिए The Shudra और The News Beak की ओर से बहुजन यूट्यूबर को एक मंच पर लाने के लिए Second All India Bahujan Youtubers Meet 2021 का सफल आयोजन किया गया। बाबा साहब हमेशा कहते थे कि बहुजन समाज को संगठित रहना चाहिए। बाबा साहब के इसी संदेश के मद्देनज़र हम बहुजन यूट्यूबर्स को संगठित करने और उनके बीच आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए ये कार्यक्रम किया गया।

पहली बार एक मंच पर साथ आए 100 बहुजन यूट्यूबर

बहुजन यूट्यूबर इतिहास के इस सबसे बड़े जमावड़े में 100 बहुजन यूट्यूबर शामिल हुए। बड़े यूट्यूब चैनल से लेकर दूर दराज़ के इलाकों में काम करने वाले यूट्यूबर्स को इस मीट में शामिल किया गया। भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद और ‘द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव’ फिल्म के निर्माता-निर्देशक रमेश थेटे बतौर स्पेशल गेस्ट शामिल हुए। बीएसपी के राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ भी हमारे खास मेहमान थे लेकिन व्यस्तता के कारण वो हमसे नहीं जुड़ पाए।

ऑनलाइन मीटिंग में किसने क्या कहा ?

प्रो दिलीप मंडल, एडवॉकेट नितिन मेश्राम, डॉ कौशल पवार, डॉ लक्ष्मण यादव, अशोक दास, वैभव कुमार, डॉ मनीषा बांगर और डॉ रतन लाल समेत तमाम प्रमुख वक्ताओं ने यूट्यूब और बहुजन मीडिया से जुड़े मसलों पर प्रतिभागियों को वैचारिक और तकनीकी ट्रेनिंग दी।

क्वालिटी कंटेंट देना सबसे ज़रूरी – डॉ रतन लाल

लेखक विचार और दिल्ली यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ रतन लाल ने इस जुटान में शामिल सभी लोगों को कंटेंट की क्वालिटी सुधारने संबंधित विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा ‘हमारी एक बड़ी ज़िम्मेदारी है, हम सब अपने समाज को दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं। अगर हमारा कंटेंट बढ़िया नहीं होगा, तथ्यपरक नहीं होता, ऐतिहासिक संदर्भ नहीं होगा तो हम अपने समाज को भ्रमित भी कर सकते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि हम कंटेंट, भाषा, तथ्य और थंबनेल वग़ैरह पर सावधानी बरतें।’

ये आयोजन युग बदलने वाली घटना है – प्रो दिलीप मंडल

प्रसिद्ध विचारक, लेखक और वरिष्ठ पत्रकार प्रो दिलीप मंडल ने बहुजन मीडिया की अहमियत, भविष्य और चुनौतियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बहुजन यूट्यूबर के सबसे बड़े जमावड़े को ‘एक युग बदलने वाली’ घटना बताया और इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा ‘ये अचानक नहीं है कि हम आज की तारीख़ में यूँ एकजुट हुए हैं। हम राष्ट्रपिता फुले से लेकर बाबा साहब और पेरियार से लेकर मान्यवर कांशीराम की मिशनरी पत्रकारिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। आप सबका यूँ साथ आना ही भारतीय मास कम्यूनिकेशन इतिहास के लिहाज़ से एक नए युग की शुरुआत है।’

नई गाइडलाइंस अभिव्यक्ति की आज़ादी पर आतंकी हमला है – एडवॉकेट नितिन मेश्राम

सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने वकील नितिन मेश्राम ने डिजिटल मीडिया पर सरकार की नई गाइडलाइंस के बारे में अहम चर्चा की। उन्होंने कहा ‘डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर सरकार की नई गाइडलाइंस असल में अभिव्यक्ति की आज़ादी की पर आतंकी हमला है। ये एक साज़िश है, लोगों के बोलने के अधिकार पर हमला है। सरकार बिना संसद में चर्चा किए ऐसे नियम या गाइडलाइंस नहीं बना सकती’

बहुजन डिजिटल पत्रकारों का एक संगठन बने – अशोक दास

दलित दस्तक मीडिया समूह के संपादक अशोक दास ने दूसरे बहुजन यूट्यूबर्स मीटिंग में बहुजन डिजिटल पत्रकारों के बीच आपसी मेलजोल और संगठन पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा ‘हम सबको पता है कि एकता में शक्ति होती है इसलिए अगर हम एकजुट रहेंगे तो ना सिर्फ़ हम मज़बूत रहेंगे बल्कि हमारी पहचान भी होगी। हम आपस में सहयोग कर सकते हैं, ख़बरें और वीडियो साझा कर सकते हैं और मुश्किल में एक-दूसरे के साथ खड़े हो सकते हैं। मौजूदा वक़्त में हम पर कभी भी कोई कार्रवाई हो सकती है, ऐसे में साथ होंगे तो मज़बूत रहेंगे।’

महिला यूट्यूबर की संख्या बहुत कम है – डॉ कौशल पवार

विचारक, लेखक और दिल्ली यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ कौशल पवार ने इस कार्यक्रम में ‘महिला यूट्यूबर और डिजिटल स्पेस में जेंडर का सवाल’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा ‘ना सिर्फ़ महिला यूट्यूबर की संख्या कम है बल्कि यूट्यूब चैनलों में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व ना के बराबर है। बहुजन चैनलों के दर्शक वर्ग में भी महिलाओं का अनुपात बहुत कम है। इसका कारण ये भी है कि बहुजन यूट्यूबर बहुजन यौन हिंसा के अलावा महिलाओं से जुड़े मसलों को प्रमुखता से नहीं दिखाते। जब तक महिलाओं को प्राथमिकता नहीं दी जाती, तब तक बदलाव नामुमकिन है।’

इसके नतीजे निकलेंगे, ये एक आग़ाज़ है – रमेश थेटे

भीमा कोरेगाँव के ऐतिहासिक युद्ध पर ‘द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव’ फ़िल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर रमेश थेटे इस आयोजन में स्पेशल गेस्ट के तौर पर शामिल हुए। उन्होंने कहा ‘मैंने बतौर IAS अफसर तमाम विभागों में रहकर देखा है कि सरकारें, प्रशासन और मीडिया हमारे लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है। इस स्थिति में बदलाव को हम सब चाहते हैं। ये आयोजन उस दिशा में एक आगाज़ है और आने वाले वक़्त में इसके अहम नतीजे निकलेंगे।’

मैं जो कुछ भी हूँ, बहुजन यूट्यूबर्स की बदौलत हूँ – आज़ाद

आज़ाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद भी इस कार्यक्रम में बतौर स्पेशल गेस्ट शामिल हुए। उन्होंने बहुजन मीडिया की अहमियत पर अपना नज़रिया पेश करते हुए कहा ‘मैं आज जो कुछ भी हूँ बहुजन यूट्यूबर्स की बदौलत हूँ। चाहे वो दुनिया में नाम हो या यहाँ मेरे काम को आप दिखाते हैं, उससे जो पहचान मिली है, उसका श्रेय बहुजन मीडिया को ही जाता है। पत्रकारिता समाज का आईना है और ये उसकी दशा और दिशा तय करती है। बहुजन मीडिया ही हमारा मेन स्ट्रीम मीडिया है। लेकिन ध्यान रखना है कि हम किसी की भक्ति में ना फंसें।’

बहुजनों-अल्पसंख्यकों की स्टीरियोटाइप रिपोर्टिंग से बचें – डॉ मनीषा

विचारक, राजनीतिक विश्लेषक और नेशनल इंडिया न्यूज़ की एमडी डॉ मनीषा बांगर ने बहुजन मीडिया को बहुजनों और अल्पसंख्यकों की स्टीरियोटाइप रिपोर्टिंग से बचने की ट्रेनिंग दी। उन्होंने कहा ‘मनुवादी मीडिया बहुजनों और अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ साज़िशन छवियाँ गढ़ता है। कोरोना के नाम पर तब्लीगी जमात का मसला हो या फिर भीमा कोरेगाँव में हिंसा के नाम पर बहुजनों को बदनाम करने का मुद्दा, मीडिया जानबूझकर ऐसे नैरेटिव खड़े करता है। बहुजन मीडिया को उनकी साज़िश में नहीं पड़ना है, लिबरल मीडिया का भक्त नहीं बनना है और अपनी भाषा, शब्द और नज़रिया विकसित करनी चाहिए।’

बहुजन मीडिया के लिए आदिवासियों को प्राथमिकता ज़रूरी – डॉ मीणा

लेखक, विचारक और दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफ़ेसर जितेंद्र मीणा ने बहुजन मीडिया में आदिवासी मसलों की अनदेखी पर चिंता जताते हुए कहा ‘बहुजन विमर्श का केंद्र जाति बन गई है लेकिन आदिवासियों के लिए जाति कोई मुद्दा नहीं है, उनके लिए संसाधनों, जल-जंगल और ज़मीन का मसला अहम है। उनके लिए अस्तित्व का सवाल है। ऐसे में उनके मसलों को अहमियत देना ज़रूरी है, बस्तर नरसंहार जैसी ख़बरों को प्राथमिकता देना अहम है। मनुवादी मीडिया से हमें कोई उम्मीद नहीं है। बहुजन एकता की संकल्पना में क्या आदिवासी शामिल हैं? इसका ध्यान रखना होगा।’

व्लॉगिंग की अहमियत समझें बहुजन – अंजुल बमरोलिया

देश के इकलौते बहुजन व्लॉगर और तथागत लाइव चैनल के फाउंडर अंजुल बमरोलिया ने बहुजन मसलों पर व्लॉगिंग की संभावनाओं के साथ-साथ व्लॉगिंग से जुड़े तकनीकी पहलुओं के बारे में बारीकी से समझाया। उन्होंने कहा ‘बहुजन व्लॉगर बहुत ज़्यादा अनरेटेड हैं लेकिन यूट्यूब पर सबसे ज़्यादा व्लॉगिंग को ही पसंद किया जा रहा है। लोग रियल लाइफ़ से जुड़ा कंटेंट पसंद कर रहे हैं। व्लॉगिंग एक पावरफुल टूल है जिसे बहुजन बहुत ज़्यादा समझ नहीं रहे हैं। व्लॉगिंग के ज़रिए आप बहुजनों के प्रति स्टीरियोटाइप को भी तोड़ सकते हैं।’

हमारे पुरखे असली कंटेंट प्रोवाइडर थे – डॉ लक्ष्मण यादव

विचारक, लेखक, एक्टिविस्ट और डीयू में पढ़ाने वाले डॉ लक्ष्मण यादव ने इस दौरान बहुजन यूट्यूबर्स को सामाजिक न्याय के विचार की ट्रेनिंग दी ताकि उनके कंटेंट में इसकी झलक दिखती रहे। उन्होंने कहा ‘कुछ तथाकथित मेरिटधारी लोग कहते हैं कि हमारे यूट्यूबर क्वालिटी कंटेंट प्रोवाइडर नहीं है, असल में हमारे पुरखे इस देश के असली कंटेंट प्रोवाइडर थे वरना इस देश का जो कंटेंट है वो दुनिया में मुँह दिखाने लायक़ नहीं है। मुख से बच्चे पैदा करना, भुजाओं से बच्चे पैदा करना, सूरज को खा जाना, आठ हाथ होना जैसी बातें हैं दुनिया भर मे मज़ाक का पात्र हैं। इस फ़ोरम पर मैं ऐसे तमाम लोगों से परिचित हूँ जो क्वालिटी कंटेंट भी दे रहे हैं। जिसकी ज़रूरत थी हम वो कर रहे हैं। हम जिन विचारों पर काम कर रहे हैं वो विचार मानवता को बचाने का है। हमारा संघर्ष सिर्फ़ दलित-आदिवासियों या पिछड़ों के लिए नहीं है, इस देश को बचाने का संघर्ष है। कंटेंट हमारे पास अपरंपार है बस कोशिश करनी है कि सामाजिक न्याय के विचार को समाहित कर सकें। हमारे पुरखे हमारे हिस्से की हार, हार चुके हैं। अब आगे बढ़ना है और सामाजिक न्याय की वैचारिकी को आगे बढ़ाना है।’

ख़बरों के चयन और स्टोरी आइडिया की जानकारी ज़रूरी – सुमित चौहान

The Shudra और The News Beak के संपादक सुमित चौहान ने बहुजन मीडिया से जुड़े लोगों को बताया कि कैसे हम खबरों या मुद्दों का चयन कर सकते हैं और कहां से स्टोरी आइडिया ले सकते हैं। उन्होंने कहा ‘खबरों या मुद्दों के चयन में SC-ST पर हुई जातीय हिंसा या यौन हिंसा से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता दें। SC-ST और OBC से जुड़े आरक्षण पर कोई खबर या कोर्ट का फैसला-टिप्पणी हो तो उसपर खबर बनाएं। बहुजन नेताओं या सेलेब्रिटीज़ की सोशल मीडिया पोस्ट पर ध्यान रखें, सोशल मीडिया के ट्रेंड्स को फोलो करें। गूगल ट्रेंड्स और गूगल अलर्ट के ज़रिए खबरों का चुनाव करें। विदेश में जातिवाद की घटनाओं पर खबर बनाएं और बहुजन इतिहास से जुड़े दिनों पर भी वीडियो बना सकते हैं।’

यूट्यूब एल्गोरिदम को समझना बेहद ज़रूरी है – वैभव कुमार

DNN हिंदी के संपादक वैभव कुमार ने बताया कि कंटेंट के लिहाज़ से यूट्यूब एल्गोरिदम को समझना क्यों ज़रूरी है। उन्होंने इससे जुड़ी तमाम तकनीकी पहलुओं को बारीकी से समझाया। उन्होंने कहा ‘यूट्यूब एल्गोरिदम के ज़रिए आपके वीडियो ज्यादा लोगों तक पहुंच सकते हैं। टाइटल, डिस्क्रिप्शन और की-वर्ड्स का ध्यान रखें। मेटाडेटा के लिहाज़ से यहां कुछ कॉमन की-वर्ड रखें और ऐसे टैग वर्ड्स डालें जो विषय से जुड़े हों और जिन्हें लोग सर्च करते हैं। अगर आपके वीडियो में लाइक और कमेंट ज्यादा आते हैं, आप दर्शकों से संवाद कीजिए, इससे यूट्यूब एल्गोरिदम आपके उस वीडियो को रैकिंग में ऊपर ले जाती है। वॉचटाइम भी आपकी वीडियो को आगे बढ़ाने में बेहद अहम होती है इसलिए वीडियो के उन हिस्सों को पहले इस्तेमाल करें जो ज्यादा दिलचस्प हों।’

वक्ताओं और विशेष अतिथियों के अलावा मशहूर गायिका तरन्नुम बौद्ध और हेमंत बौद्ध ने भी कार्यक्रम में अपने मधुर सुरों से मिशनरी इवेंट को और भी शानदार बना दिया। साथ ही तमाम प्रतिभागियों ने अपनी बात रखी। यूट्यूब चैनल से जुड़े तमाम तकनीकी मसलों और समस्याओं के बारे में एक-दूसरे से जाना। ओपन माइक सत्र में सभी प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी बात रखी और सवाल भी पूछे जिसका जवाब आयोजकों के अलावा प्रतिभागियों ने भी दिया। कुल मिलाकर ये इवेंट बहुजन समाज के यूट्यूबर के लिए एक वैचारिक और तकनीकी ट्रेनिंग का सेशन रहा। कार्यक्रम के संचालन का काम सुमित चौहान, वैभव कुमार और आम्रपाली जाधव ने किया। अगर आप इस पूरे इवेंट का वीडियो नीचे दिए गए लिंक पर देख सकते हैं।

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