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JNU में जनेऊलीला : कैसे SC-ST, OBC कैंडिडेट्स को एडमिशन से रोकते हैं द्रोणाचार्य ?

JNU पर गंभीर आरोप लगे हैं कि जातिवादी प्रोफेसरों ने जानबूझकर SC-ST, OBC कैंडिडेट्स को इतने कम नंबर दिए हैं ताकि उनका एडमिशन ही ना हो सके।

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प्रगतिशील मानी जाने वाली दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में जातिवाद का भयंकर मामला सामने आया है। इस खुलासे के बाद तो यही कहा जा सकता है कि जेएनयू में भी जनेऊलीला चल रही है जहां इंटरव्यू, वाइवा में जातिवादी प्रोफेसर जाति देखकर नंबर देते हैं और दलित, आदिवासी, पिछड़े समाज के शोधार्थियों के साथ पक्षपात करते हैं।

SC-ST, OBC कैंडिडेट्स को 1,2,3 नंबर

शुक्रवार को जेएनयू में पीएचडी एडमिशन का रिजल्ट सामने आया। जिसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसे कई स्क्रीनशॉट शेयर किए गए जिसमें साफ-साफ देखा जा सकता है कि दलित, आदिवासी और पिछड़ी जाति से आने वाले कैंडिडेट्स को एक-एक, दो-दो नंबर दिया गया है। जेएनयू के सेलेक्शन पैनल पर गंभीर आरोप लगे हैं कि जातिवादी प्रोफेसरों ने जानबूझकर SC-ST, OBC कैंडिडेट्स को इतने कम नंबर दिए हैं ताकि उनका एडमिशन ही ना हो सके।

सोशल मीडिया पर छाया #JNUPhDScam 

सोशल मीडिया पर #JNUPhDScam के साथ अकादमिक जगत से जुड़े छात्रों, टीचर्स और छात्र एक्टिविस्ट्स के साथ-साथ बड़ी संख्या में लोग इस जातिवादी रवैये के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।

प्रो दिलीप मंडल ने की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग 

डॉ लक्ष्मण यादव ने पूछा, क्या सोचकर 1 नंबर दिया ?

जातिवादी प्रोफेसरों पर कानूनी कार्यवाही हो – भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद 

आदिवासी हैं तो जेएनयू में एडमिशन नहीं मिलेगा – डॉ जितेंद्र मीणा

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