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ओम प्रकाश वाल्मिकी की जयंती पर पढ़िए उनकी महान रचना ‘ठाकुर का कुआं’

आज हिंदी साहित्य के महान हस्ताक्षर ओम प्रकाश वाल्मिकी की जयंती है।

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Artwork by @Yoabhish

आज हिंदी साहित्य के महान हस्ताक्षर ओम प्रकाश वाल्मिकी की जयंती है। ‘जूठन’ जैसी अपनी रचनाओं के ज़रिए उन्होंने ना सिर्फ जातिवाद के गहरे दंश को दुनिया के सामने रखा बल्कि उस पीड़ा को भी बयां किया जो जाति की क्रूर व्यवस्था के कारण एक दलित को सहनी पड़ती है। जो लोग कहते हैं कि जाति और जातिवाद उन्हें समझ नहीं आता, वो एक बार ओम प्रकाश वाल्मिकी की ‘जूठन’ को ज़रूर पढ़ें। वाल्मिकी जी की जयंती के मौके पर पढ़िए उनकी मशहूर कविता ‘ठाकुर का कुआं’

चूल्‍हा मिट्टी का
मिट्टी तालाब की
तालाब ठाकुर का ।

भूख रोटी की
रोटी बाजरे की
बाजरा खेत का
खेत ठाकुर का ।

बैल ठाकुर का
हल ठाकुर का
हल की मूठ पर हथेली अपनी
फ़सल ठाकुर की ।

कुआँ ठाकुर का
पानी ठाकुर का
खेत-खलिहान ठाकुर के
गली-मुहल्‍ले ठाकुर के
फिर अपना क्‍या ?
गाँव ?
शहर ?
देश ?

(नवम्बर, 1981)

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