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गुजरात : राष्ट्रपति, स्मृति ईरानी समेत नेताओं को भेजी SC-ST महिलाओं के साथ अत्याचार को दिखाती साड़ियां

अहमदाबाद के दलित शक्ति केंद्र में महिलाओं ने एक साड़ी बनाई है जिसमें दलित-आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार की वारदातों को दिखाया गया है।

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दलित शक्ति केंद्र की महिलाओं ने स्पेशल साड़ी बनाई है।

मणिपुर हिंसा के बाद से ही दलित-आदिवासी महिलाओं के साथ हो रहे अपराध चर्चा का विषय बने हुए हैं, दलित और आदिवासी महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध ने सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक वंचित वर्गों की महिलाओं के साथ ऐसी दरिंदगी की जाती रहेगी? इस कड़ी में महिला उत्पीड़न के खिलाफ एक अनूठे ढंग से विरोध जताया जा रहा है। स्मृति ईरानी जैसी महिला नेता कथित Flying Kiss जैसे मुद्दों पर तो बोलती हैं लेकिन वंचित वर्गों की महिलाओँ के साथ आए दिन हो रहे वहशीपन पर खामोश रहती हैं।

स्पेशल साड़ी बनाकर नेताओं को भेजी

गुजरात के दलित शक्ति केंद्र की महिलाओं ने ‘द्रौपदी से द्रौपदी तक’ अभियान की शुरुआत की है। अहमदाबाद के दलित शक्ति केंद्र में महिलाओं ने एक साड़ी बनाई है जिसमें दलित-आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार की वारदातों को दिखाया गया है। ये साड़ी भारत की राष्ट्रपति, तीन महिला राज्यपाल, सभी राजनीतिक दलों की दो महिला नेताओं, महिला हिंसा के मुद्दे पर आवाज उठाने वाली महिला पत्रकारों, महिला कार्यकर्ताओं और संवेदनशील महिला कलाकारों को भेजी गयी और उनसे अनुरोध किया गया की वो ये साड़ी भारतीय स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को झंडारोहण के कार्यक्रम में पहने ताकि आज़ादी के अमृत महोत्सव में हमारा देश देख सके कि आज़ादी मिलने के इतने साल बाद भी दलित-आदिवासी महिलाओं को इतनी यातनाओं से गुजरना पड़ रहा है।

बढ़ते अपराधों पर कब लगेगी लगाम ?

आयोजकों की ओर से शेयर की गई प्रेस रिलीज़ में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक 2014 से 2021 तक दलित-आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के 31,967 मामले सामने आ चुके हैं। यानी आज़ादी के बाद दर्ज दलित – आदिवासी महिलाओं से बलात्कार के कुल मामलों में से 40 प्रतिशत अकेले मोदी सरकार के पिछले 8 सालों के दौरान दर्ज़ हुए हैं।

क्या राष्ट्रपति और महिला नेता पहनेंगी ये साड़ी ?

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मणिपुर हिंसा पर तुरंत कंट्रोल किया जाए और दलित-आदिवासी महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर लगाम लगाई जाए। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने राष्ट्रपति और महिला नेताओं से अपील की है कि वो इस साड़ी को 15 अगस्त को झंडा फहराते वक्त जरूर पहनें। लेकिन अब ये देखना होगा कि क्या भारत की राष्ट्रपति गुजरात की इन दलित-आदिवासी महिलाओं की ओर से भेजी गई साड़ी को पहनती हैं?

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