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दलित शख्स ने घर का नाम रखा ‘चमार भवन’, वजह आपको सोचने पर मजबूर कर देगी !

किसान आंदोलन का गढ़ बन चुके सिंघु बॉर्डर से सोनीपत की तरफ जाते हुए संदीप सिंह ने चमार भवन को देखा और उसकी कहानी को अपने कैमरे में कैद किया। यहां रहने वाले सर्वहित पाल चमार ने जातिवाद से तंग आकर अपने घर को 'चमार भवन' नाम दे दिया तो उनके बेटे ने घर के वाईफाई को भी यही नाम दे दिया।

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भारत एक जाति प्रधान देश है। यहां इंसान की सामाजिक और आर्थिक हैसियत उसके जन्म के हिसाब से मिली जाति से ही तय होती है। कुछ जातियां जन्मजात ऊंची मानी जाती हैं और उन्हें दुनिया भर के विशेषाधिकार मिलते हैं जबकि कुछ जातियों को नीच कहकर उन्हें अपमानित किया जाता है। लेकिन कुछ लोग जातिवाद की बेड़ियों को तोड़कर स्वाभिमान से जीने की हुंकार भरते हैं। ऐसे ही स्वाभिमान से जी रहे हैं हरियाणा के कुंडली कस्बे के रहने वाले सर्वहित पाल चमार।

किसान आंदोलन का गढ़ बन चुके सिंघु बॉर्डर से सोनीपत की तरफ जाते हुए संदीप सिंह ने चमार भवन को देखा और उसकी कहानी को अपने कैमरे में कैद किया। यहां रहने वाले सर्वहित पाल चमार ने जातिवाद से तंग आकर अपने घर को ‘चमार भवन’ नाम दे दिया तो उनके बेटे ने घर के वाईफाई को भी यही नाम दे दिया।

सर्वहित कहते हैं ‘हम सरदार को सरदार जी, ब्राह्मण को पंडित जी, जाट को चौधरी साहब और मुसलमान को मियां जी कहते हैं लेकिन ऐसा सम्मान हमें नहीं मिलता। लोग हमारी जाति की वजह से हमें इज्जत नहीं देते। इसीलिए मैंने अपने घर को ही चमार भवन का नाम दे दिया’

सर्वहित की पूरी कहानी जानने और देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर वीडियो देखें।

द शूद्र के लिए संदीप सिंह की रिपोर्ट

 

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