Home विमर्श कोरोना संकट और पीएम मोदी : क्यों नरेंद्र मोदी को भारत का...

कोरोना संकट और पीएम मोदी : क्यों नरेंद्र मोदी को भारत का ‘नीरो’ कहना चाहिए ?

नीरो के वक्त राजतंत्र था लेकिन मोदी के वक्त लोकतंत्र है। इस वक़्त कोरोना महामारी ने देश में क़हर बरपा रखा है। कोई अस्पताल की लाइन में लगकर दम तोड़ रहा है तो किसी की चिता को अग्नि देने के लिए उसका शव लाइन में इंतज़ार कर रहा है। लेकिन ऐसे वक़्त में भी भारत के नीरो यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियाँ कर रहे हैं।

419
0
blank
www.theshudra.com

आपका सहयोग हमें सशक्त बनाएगा

# हमें सपोर्ट करें

Rs.100  Rs.500  Rs.1000  Rs.5000  Rs.10,000

कहते है 64 ईस्वीं में रोम शहर में ज़बरदस्त आग लगी थी। ये आग इतनी भयंकर थी कि क़रीब 6 दिन तक जलती रही और इस आग में रोम के 14 में से 10 शहर बर्बाद हो गए। जिस वक़्त रोम जल रहा था, तब वहाँ का राजा नीरो अपने आप में मगन होकर बाँसुरी बजा रहा था। खैर उस वक़्त राजतंत्र था और राजा जो चाहे कर सकता था लेकिन लोकतंत्र में भी ये सब कहां बदला है। अब अपने ही देश को ले लीजिए। इस वक़्त कोरोना महामारी ने देश में क़हर बरपा रखा है। कोई अस्पताल की लाइन में लगकर दम तोड़ रहा है तो किसी की चिता को अग्नि देने के लिए उसका शव लाइन में इंतज़ार कर रहा है। लेकिन ऐसे वक़्त में भी भारत के नीरो यानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनावी रैलियाँ कर रहे हैं।

हद तो ये हो गई कि दिन में पीएम मोदी रैली में आई भीड़ को रिकॉर्ड बताते हैं और शाम में आकर कोरोना पर समीक्षा बैठक करते हैं। मतलब एक आदमी जो दिन भर कोरोना वायरस को फैलाने का पक्का इंतज़ाम करके आया है वो शाम को कोरोना से बचने के तरीक़ों पर ज्ञान भी देता है। ये तो हद ही हो गई। पीएम मोदी की रैली में ना ही उनके मुँह पर मास्क होता है और ना ही उनकी रैली में आई भीड़ दो गज़ की दूरी पर खड़ी होती है। लेकिन सार्वजनिक जगह पर मास्क ना पहनने पर कोई पीएम का चालान कर सकता है और ना ही उनके भक्तों का।

इनकी ऐसी लापरवाही को देख कर कई बार ऐसा लगता है कि कोरोना वायरस असल में है ही नहीं… क्योंकि ये वायरस हर जगह पहुँच जाता है लेकिन इनकी रैली और रोड में शो में कोरोना की नो एंट्री है। लेकिन एक साथ जल रही दर्जनों चिताओं और अपनों को खो देने वाले लोगों की चितकार की तस्वीरें जब सामने आती है तो लगता है कि ये वायरस सच में बहुत ख़तरनाक है। जिस पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी और उनके सहयोगी हज़ारों लाखों की भीड़ जुटा रहे हैं। 

अब तक कोरोनावायरस से भारत में 1,78,000 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 1,78,000… कुछ लोगों के लिए ये महज़ आँकड़े हैं और कुछ लोगों के लिए इन आँकड़ों में उनका पूरा परिवार बिखर चुका है। लेकिन जब दुनिया कोरोना से बचने के लिए अस्पताल बनवा रही थी तब हमारे देश में मोदी सरकार राम मंदिर का शिलान्यास कर रही थी। जब दुनिया वेंटिलेटर की संख्या बढ़ा रही थी, तब मोदी सरकार बिहार में कुछ भी करके सरकार बनाने में लगी हुई थी। जब दुनिया ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड्स बनवा रही थी तब मोदी सरकार थाली बजवा रही थी। और जब दुनिया डॉक्टरों और नर्सों को आपदा से निपटने के लिए ट्रेनिंग दे रही थी तब मोदी सरकार देश की सरकारी कंपनियों और संपत्ति को निजी हाथों में बेच रही थी। 

पिछली बार जब कोरोना आया तो बहाना बना लिया कि देश इस महामारी के लिए तैयार नहीं था, लेकिन एक साल बाद भी क्या बदला? क्या आपने बीते एक साल में सुना कि मोदी सरकार ने देश में कोई नया अस्पताल बनवाया हो? क्या बीते एक साल में आपने कभी सुना कि कोरोनावायरस से बचने के लिए कुछ ठोस इंतज़ाम किए गए हों? 

रोज़ाना लाखों नए केस आ रहे हैं 

Covid19india.org के आकंड़ों के मुताबिक18 अप्रैल – 2,74,944 लाख नए मामले सामने आए। 17 अप्रैल को 2,60,895, 16 अप्रैल को 2,43,002 और 15 अप्रैल को 2,16,828 नए केस आए। फ़िलहाल देश में 20 लाख से ज़्यादा एक्टिव केस हैं और रोज़ाना क़रीब 15,00 लोग दम तोड़ रहे हैं।

सरकारी आँकड़े भी सरकार की तरह ही लापरवाह है क्योंकि रह-रहकर कभी कभार मीडिया में जो सच्ची रिपोर्ट आ रही हैं, वो तो मरने वालों की संख्या कहीं ज़्यादा बता रहे हैं। शमशान घाट में लोगों के अंतिम संस्कार का मौक़ा भी नहीं मिल पा रहा है, वहाँ भी लोगों को घटों का इंतज़ार करना पड़ रहा है… शमशान घाट का वादा करने वाली सरकार पूरे देश को ही मरघट जैसा बना दिया है। हर तरफ़ निराशा, हर तरफ़ परेशान करने वाली ख़बरें…

सोशल मीडिया पर परेशान वाली खबरें 

अब तो फ़ेसबुक और ट्विटर खोलने से भी डर लगने लगा है क्योंकि टाइमलाइन पर बस मदद माँग रहे लोगों की पोस्ट ही नज़र आती हैं या फिर लोग अपना दर्द बया कर रहे होते हैं कि कैसे इलाज ना मिल पाने के कारण उन्होंने अपने करीबी शख़्स को खो दिया। कोई ट्विटर पर मदद माँगते-मांगते दम तोड़ दे रहा है तो कोई दिन भर अस्पताल के बाहर पड़े-पड़े… भक्त भी अब अपनी अंधभक्ति के बावजूद अपने देवता को प्रकट ना होते देख अपनी पीड़ा जाहिर कर रहे हैं लेकिन देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को चुनाव जीतने से ज़्यादा कुछ ज़रूरी नहीं लगता। 

क्योंकि अगर ज़रूरी लगता तो आज देश का ये हाल नहीं होता। अगर ज़रूरी लगता तो हम एक साल में बचाव की बेहतर तैयारी कर सकते थे? अगर ज़रूरी लगता इस मुश्किल वक़्त में देश की सरकार लोगों के साथ खड़ी होती है लेकिन सरकार ने तो जैसे देशवासियों को अनाथ छोड़ दिया है। लेकिन जहां धर्म की बात पर लोगों को दो हिस्सों में बाँटना हो तो वहाँ सरकारें पूरी मुस्तैदी दिखाती हैं। कोरोना काल में भी कुंभ के मेले में लाखों साधुओं का जुटना इसका उदाहरण नहीं तो और क्या है? अपना धार्मिक एजेंडा सेट करने के लिए साधु-संतों की जान से भी खिलवाड़ की गई और अब ये लाखों साधु देश भर में घूम रहे हैं। ज़रा सोचिए लाखों से करोड़ों की संख्या होने में कितना वक़्त लगेगा।

दिल्ली-राजस्थान में लॉकडाउन, देश में भी लगेगा ?

अपनी नाकामयाबी छुपाने के लिए मोदी सरकार फिर से लॉकडाउन लगा सकती है क्योंकि हालात सँभालना तो इनके बसकी बात नहीं है, ऐसे में एक ही चीज़ दिखती है…सब कुछ बंद कर दो। क्या पता जल्द ही हमारे प्रधान सेवक टीवी पर अवतरित होकर कह दें कि भाइयों-बहनों आज रात 12 बजे से संपूर्ण लॉकडाउन लगाया जाता है। उन्हें देश को ऐसे सरप्राइज़ देने में बड़ा मज़ा आता है। फिर चाहे देश की गरीब आवास भूखी मरे, सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर अपने घरों तक जाए या अपनी रोज़ी-रोटी से हाथ धो बैठे… उनके लिए सब चंगा सी… क्योंकि जलते हुए रोम को देखकर नीरो की बाँसुरी की आवाज़ और तेज़ होती जा रही थी। ऐसे में मोदी सरकार के लिए इरतेज़ा निशात का शेर सबसे मौज़ू लगता है। कुर्सी है, तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं, कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते। 

साथियों, नरेंद्र मोदी या अमित शाह तो कुर्सी से चिपक कर बैठे हैं इसलिए आप भी अपने घरों में ही बैठे रहें, बहुत ज़रूरी ना हो तो बाहर ना निकलें… क्योंकि हमारे देश में कोरोना वायरस से लड़कर तो शायद हमारी बॉडी जीत जाए लेकिन सिस्टम से जीतना बहुत मुश्किल है, ये बदहाल सिस्टम ही मौत का सबब बन सकता है।

  telegram-follow   joinwhatsapp     YouTube-Subscribe

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here