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इंटरव्यू : आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर RJD सांसद मनोज कुमार झा का बड़ा बयान

मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट से ऐसे स्वर उठने की ना सिर्फ आलोचना की बल्कि सुप्रीम कोर्ट की संरचना पर भी सवाल उठाए।

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सुमित चौहान ने आरजेडी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता प्रो मनोज कुमार झा से खास बातचीत की। (Photo - Ashish Kumar Kataria)

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पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि आरक्षण कितनी पीढ़ियों तक दिया जाता रहेगा? जिसके बाद आरक्षण को लेकर बहस छिड़ गई। इसी को लेकर The Shudra और The News Beak संपादक सुमित चौहान ने आरजेडी के राज्यसभा सांसद और प्रवक्ता प्रो मनोज कुमार झा से खास बातचीत की जिसमें उन्होंने EVM से लेकर कोरोना की आड़ में चल रहे सियासी खेल पर अपनी बेबाक राय रखी।

मनोज झा के साथ पूरा इंटरव्यू देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

मनोज कुमार झा ने इंटरव्यू के दौरान ये बातें कहीं 

कोरोना के बहाने विरोध की आवाज़ को दबाया जा रहा है
कोरोना की आड़ में सत्ता निरंकुश बनती जा रही है
लोकतंत्र में ऐसा दौर आ गया है जहां सिर्फ़ चुनाव अहम है
सरकार की प्राथमिकताएँ पीछे छूट रही हैं
मंदिर-मस्जिद बड़े होने से लोगों की ज़िंदगी नहीं बदलती
बीमारी, दवाई, कमाई, सिंचाई पर बात नहीं करती
आने वाले वक़्त में ये तालियाँ ख़ामोश हो जाएँगी
प्राइवेटाइज़ेशन को लेकर लोगों के मन में आशंकाएँ हैं
बैंक-LIC जैसे संस्थान सालों की मेहनत से बने हैं
निजी हाथों में देश की सारी संपत्ति चली जाएगी
निजीकरण से प्रतिनिधित्व देने वाला आरक्षण ख़त्म हो जाएगा
निजीकरण हो तो वहाँ आरक्षण की व्यवस्था बहाल हो
संसद में विपक्ष मज़बूत नहीं रहा, लोग सड़क पर आएँगे
सरकार की कथनी और करनी में बहुत बड़ा फ़र्क़ है
सरकार बाबा साहब के म्यूज़ियम बनाने का दावा करती है
बाबा साहब आज आ जाएँ तो अपनी मूर्तियाँ नहीं देखेंगे
वंचितों की भागीदारी में लगातार गिरावट हुई है
आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की ऐसी सोच नहीं होनी चाहिए
तमाम विभागों में प्रतिनिधित्व का हाल क्या है ?
किसी विभाग में वंचितों का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं
मुझे दुख है सुप्रीम कोर्ट से ऐसे स्वर उठ रहे हैं
PM कहते हैं 70 में कुछ नहीं हुआ, SC कहता 70 से लाभ मिला
लालू अगर संसद में होते तो कृषि बिल पास नहीं होते
लालू ने सदन में जातिवार जनगणना का मसला उठाया
EVM पर लोगों का भरोसा तेज़ी से कम हुआ
हमारे पक्ष के पोस्टल बैलेट को ख़ारिज किया गया
EVM की जगह बैलेट पेपर पर चुनाव होना चाहिए
अगर बैलेट पेपर नहीं तो 100 % VVPAT का मिलान हो
अब चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का सवाल है

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