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हाथरस पीड़िता के घर पर मिली ‘नक्सली भाभी’ पर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा।

क्या सच में डॉ राजकुमारी माहौल बिगाड़ने पहुँची थी? क्या सच में डॉ राजकुमारी का नक्सलियों से कोई संबंध है ? द शूद्र ने डॉ राजकुमारी पर लगे तमाम आरोपों की पड़ताल की।

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डॉ राजकुमारी बंसल पर यूपी सरकार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। (फोटो-वीडियो ग्रैब)

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हाथरस की नक़ली भाभी, हाथरस की नक्सली भाभी, यूपी में दंगा भड़काने आई थी संदिग्ध महिला, परिवार को उकसाने आई थी नक्सली भाभी। ये वो लेबल हैं जो मनुवादी मीडिया ने उस महिला को दिए हैं जो हाथरस पीड़िता के घर में मिली थी। हाथरस कांड में विरोध की आवाज़ को दंगे भड़काने की साज़िश बताने वाली यूपी सरकार ने डॉ राजकुमारी पर दंगे भड़काने का ही आरोप लगा दिया। लेकिन क्या सच में डॉ राजकुमारी माहौल बिगाड़ने पहुँची थी? क्या सच में डॉ राजकुमारी का नक्सलियों से कोई संबंध है ? द शूद्र ने डॉ राजकुमारी पर लगे तमाम आरोपों की पड़ताल की।

पहला आरोप – पहचान छुपा कर रह रही थी

डॉ राजकुमारी पर आरोप है कि वो पीड़ित परिवार के घर में नक़ली भाभी बनकर रह रही थी… दावा किया जा रहा है कि डॉ राजकुमारी ने परिवार से अपनी पहचान छुपाई और वो लगातार उन्हें उकसाने लगी। लेकिन इस आरोप में रत्ती भर भी वज़न नहीं है। क्योंकि डॉ राजकुमारी ने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात के दौरान हर किसी को अपनी असली पहचान बताई थी। उन्होंने खुद ही बताया था कि उनका परिवार से कोई रिश्ता नहीं हैं लेकिन वो अपने समाज की बेटी को न्याय दिलाने आई हैं। हमें एक ट्विटर पर अभिनव पांडेय की ओर से शेयर किया गया एक एक्सक्लूसिव वीडियो भी मिला जिसमें वो खुद अपने बारे में बता रही हैं। जब डॉ राजकुमारी ने पहले ही दिन परिवार को बता दिया था कि वो कौैन हैं, कहां से आई हैं, क्यों आई हैं, तो फिर उनपर पहचान छुपाकर रहने का आरोप क्यों लगाया गया ?

दूसरा आरोप – नक्सलियों से संबंध है

डॉ राजकुमारी पर दूसरा आरोप ये है कि उनके संबंध नक्सलियों से हैं… यूपी की जांच एजेंसियाँ इस बारे में पड़ताल कर रही हैं लेकिन हमारे पास जो जानकारी है, उसके मुताबिक़ डॉ राजकुमारी जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र मेडिकल कोलेज में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर हैं वो एक फ़ोरेंसिक एक्सपर्ट भी हैं। वीडियो में उन्होंने ख़ुद इस बारे में बताया था। यही नहीं…जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से डॉ राजकुमारी को क्लीन चिट दे दी गई है। कॉलेज के डीन डॉ. प्रदीप प्रसाद ने तो ये तक कह दिया है कि हमारी ओर से डॉ. राजकुमारी बंसल को कोई भी शो कॉज नोटिस जारी नहीं होगा

तीसरा आरोप – दंगा भड़काने आई थी

डॉ राजकुमारी पर तीसरा आरोप ये है कि वो हाथरस में परिवार को उकसाने और दंगा भड़काने गई थी। लेकिन एंटी कास्ट एक्टिविस्ट और मैं एक कार सेवक था जैसी मशहूर किताब के लेखक भँवर मेघवंशी ने इस आरोप को भी बेबुनियाद बताया है।

उन्होंने शून्यकाल पर प्रकाशित अपने लेख में लिखा…’दरअसल राजकुमारी बंसल एक आंबेडकरवादी डॉक्टर है , वे पे बैक टू सोसायटी के अम्बेडकराइट्स विचार में विश्वास करती है . हालाँकि उनका पीड़ित परिवार से कोई रक्त सम्बंध नहीं है , यह सिर्फ़ दर्द का ही रिश्ता है . वे वाल्मीकि समाज से भी नहीं है , लेकिन पीड़ित परिवार के साथ लगातार हो रही नाइंसाफ़ी ने उनको हाथरस पहुँचने पर विवश किया और वे तमाम ख़तरे उठाते हुए केवल उस गाँव पहुँची , बल्कि पीड़ित परिजनों के साथ रहकर उनको हौंसला दिया और यथा सम्भव मदद भी की। यह उन्होंने अपनी संवेदनशीलता और मानवता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।’

भँवर मेघवंशी लिखते हैं किडॉक्टर राजकुमारी के पीड़ित पक्ष से मिलकर वापस लौटने के बाद एक कहानी रची गई और उस झूठ को मीडिया जाँच एजेंसियाँ प्रचारित करके मामले से लोगों का ध्यान भटकाने की असफल कोशिश कर रही हैं वैसे तो यूपी सरकार ने दंगे भड़काने की साज़िश, योगी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने की कोशिश और भीम आर्मी और पोपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया के बीच रिश्ते होने और सौ करोड़ का विदेशी फ़ंड आने जैसे झूठ बुने गये हैपर ताज़ा झूठ यह रचा गया है कि हाथरस कांड का नक्सली कनेक्शन मिल गया है , इस घटना के तार नक्सलवादियों से जुड़े हुए हैं।’

ऐसे में सवाल उठता है कि आख़िर कब तक न्याय की माँग करने वाले बहुजनों को यूँ साज़िशों का शिकार बनाया जाता रहेगा?  वीडियो देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें। 

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