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केजरीवाल सरकार में आरक्षण पर बड़ा हमला, OBC और SC की नौकरियों की बंदरबांट ?

सवर्णों को मिले 10 % आरक्षण के हिसाब से 80 में से सिर्फ़ 8 सीट ही मिलनी चाहिए थे लेकिन EWS कैटेगरी में 19 सीटें आरक्षित की गई हैं। यानी कुल सीटों को क़रीब 24 फ़ीसदी हिस्सा सीधे सवर्णों को दे दिया गया।

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दिल्ली सरकारी ने पिछले दिनों अपने देशभक्ति बजट में डॉ आंबेडकर के नाम पर 10 करोड़ का प्रावधान कर बहुजन तबके को रिझाने की कोशिश की लेकिन असल में दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार पर बहुजनों की हक़मारी का आरोप लग रहा है। दरअसल पिछले दिनों UPSC की ओर से दिल्ली सरकार के लिए असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर के 80 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। लेकिन इन 80 पदों में SC और OBC को ना ही उनके हिस्से के आरक्षित पद दिए गए हैं और ना ही कोई बैकलॉग भरा गया है। जबकि सवर्णों को मिले 10 % EWS आरक्षण के नाम पर क़रीब 24 % पद दे दिए गए हैं। 

UPSC की ओर से जारी Advt-No-02-2021

SC, OBC को आरक्षण के हिसाब से पद नहीं 

UPSC की ओर से जारी Advt-No-02-2021 में कुल 80 पदों में से SC – 05, ST – 09, OBC – 18, EWS – 19, UR – 29, PH – 04 पद दिए गए हैं। जबकि SC के 15 % संवैधानिक आरक्षण के हिसाब से अनुसूचित जाति के लिए 12 पद आरक्षित किये जाने चाहिए थे। वहीं OBC के 27 % आरक्षण के हिसाब से 22 सीट मिलनी चाहिए थी। इसी तरह सवर्णों को मिले 10 % आरक्षण के हिसाब से 80 में से सिर्फ़ 8 सीट ही मिलनी चाहिए थे लेकिन EWS कैटेगरी में 19 सीटें आरक्षित की गई हैं। यानी कुल सीटों को क़रीब 24 फ़ीसदी हिस्सा सीधे सवर्णों को दे दिया गया जबकि 29 अनारक्षित सीट भी अघोषित तरीक़े से जनरल कैटेगरी के लोगों को ही दी जाती है। यानी कुल 80 सीटों में से 50 सीटें सिर्फ़ जनरल कैटेगरी को मिल जाएँगी। 

कौन सा रोस्टर लागू किया? 

दिल्ली के उपराज्यपाल के अधीन आने वाली इन नियुक्तियों पर कौन सा रोस्टर लागू किया गया है जिसमें संवैधानिक आरक्षण तक का पालन नहीं हुआ ? दिल्ली सरकार और एलजी को इसका जवाब देना चाहिए। नियुक्तियों का ज्यादातर फैसला और प्रक्रिया एलजी की अनुमति से ही पूरा होता है, ऐसे में एलजी दफ्तर ने आरक्षण व्यवस्था का ढंग से पालन क्यों नहीं किया ?

बैकलॉग क्यों नहीं भरा ?

अरविंद केजरीवाल सरकार को ये भी बताना चाहिए अगर EWS का बैकलॉग (पुराने ख़ाली पद) भरने के नाम पर बहुजनों के हिस्से की नौकरियों की बंदरबाँट हुई है तो फिर भला SC और OBC का बैकलॉग क्यों नहीं भरा गया? सिर्फ़ सवर्णों पर EWS के बहाने इतनी मेहरबानी क्यों की गई? अरविंद केजरीवाल सरकार इस मामले को UPSC के पाले में धकेलकर अपना पल्ला नहीं झाड़ सकती और ना ही सर्विस विभाग के एलजी के तहत होने की दुहाई दे सकती है। क्योंकि अगर UPSC ने संवैधानिक आरक्षण का पालन सही से नहीं किया या लापरवाही LG दफ्तर की ओर से हुई है तो भी दिल्ली सरकार चुपचाप बहुजनों की हकमारी होते क्यों देख रही है? इसका विरोध क्यों नहीं कर रही?

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