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गोदी मीडिया के खिलाफ शुरू हुआ ट्रेंड, किसान आंदोलन को बदनाम करने का आरोप

हिंसा की खबरों ने पिछले कई महीनों से चल रहे किसान आंदोलन की शान पर बट्टा भी लगाया और इससे गोदी मीडिया को अपना एजेंडा चलाने का मौका मिल गया। 

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(Photo - ANI)

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किसानों ने आज गणतंत्र दिवस पर इतिहास रच दिया। देश का गण आज तंत्र पर हावी दिखा। हालांकि हिंसा की खबरों ने पिछले कई महीनों से चल रहे किसान आंदोलन की शान पर बट्टा भी लगाया और इससे गोदी मीडिया को अपना एजेंडा चलाने का मौका मिल गया।

जैसे ही लालकिले पर किसानों ने मोर्चा संभाला गोदी मीडिया ज़हर उगलने लग गया। तमाम चैनल किसानों को खालिस्तानी और आतंकवादी घोषित करने लग गए। बार-बार तिरंगे के अपमान की दुहाई दी गई और लाल किले की मर्यादा को तार-तार करने जैसे शब्दों का गोदी मीडिया के एंकरों ने मिर्च-मसाला लगाकर परोसा।

लेकिन असल में किसानों ने लाल किले पर लगे तिरंगे की बेअदबी नहीं की और ना ही हमारी आन-बान-शान के प्रतीक तिरंगे का अपमान किया। तस्वीरों में साफ-साफ देखा जा सकता है कि जो झंडा किसानों ने लगाया वो खालिस्तानी झंडा नहीं था बल्कि सिख समुदाय का ‘निशान साहिब’ ध्वज़ था। जिस जगह ध्वज़ लगाया गया तिरंगा उससे ऊपर शान से लहरा रहा था लेकिन फिर भी गोदी मीडिया राष्ट्रवाद के नाम पर किसानों के खिलाफ ज़हर उगलने लग गई।

हम ये नहीं कह रहे कि लाल किले पर आज जो हुआ वो ठीक हुआ लेकिन आपको ये भी सोचना होगा कि ये वहीं किसान है जिनके 150 से ज्यादा साथी इस आंदोलन में शहीद हो चुके हैं। ऐसे में गोदी मीडिया के इस दुष्प्रचार के खिलाफ लोग सोशल मीडिया पर #GodiMediaStopMisleading के साथ ट्वीट कर रहे हैं।

@Tractor2twitr हैंडल से वो तस्वीरें शेयर की गई जिनमें पीएम मोदी निशान साहिब ध्वज को थामें नज़र आ रहे हैं।

लोग गोदी मीडिया पर गुमराह करने का आरोप लगा रहे हैं।

 

 

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