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जानलेवा हमले और लूटपाट के बाद भी FIR दर्ज कराने से क्यों डर रहे हैं पत्रकार अतुल अग्रवाल ?

राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार और हिंदी खबर के एडिटर इन चीफ अतुल अग्रवाल पर अज्ञात अपराधियों का हमला

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हिंदी खबर के एडिटर इन चीफ अतुल अग्रवाल पर अज्ञात अपराधियों का हमला

उत्तर प्रदेश सरकार भले ही दावा करती है कि यूपी अब अपराध मुक्त है। लेकिन नोएडा में हुई लूटपाट की एक वारदात ने इन दावों की पोल खोल कर रख दी है। दरअसल राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार और हिंदी खबर न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ अतुल अग्रवाल पर नोएडा एक्सटेंशन के पास कुछ अज्ञात अपराधियों ने हमला कर दिया।

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फोटो – पत्रकार अतुल अग्रवाल

फेसबुक पोस्ट के जरिए बयान की घटना

अतुल ने अपनी फेसबुक पर लिखा है कि मैं टीवी एंकर हूं इसलिए शायद मेरी जान बच गई। 19 जून की रात करीब 1 बजे वो नोएडा एक्सटेंशन के राइज पुलिस चौकी के पास से गुजर रहे थे। पुलिस चौकी से करीब 250-300 मीटर की दूरी पर 02 बाइक पर सवार 05 लड़के मेरी गाड़ी के पास आकर धमक गए। उनमें से एक लड़के ने ड्राइविंग डोर के पास आकर दरवाजे पर जोरदार लात मारी। संयोगवश डोर लॉक था, इसलिए खुला नहीं। इसके बाद उसने पिस्तौल निकाल ली। मेरे पास दरवाजा खोलने के अलावा कोई चारा नहीं था। उसने मुझे नीचे उतार दिया और खुद ड्राइविंग सीट पर जाकर बैठ गया। बाकी के सारे लड़के मुझे कवर कर खड़े हो गए। उनमें से एक तो मुझे भद्दी भद्दी गालियां दे रहा था।

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अतुल को गोली मारना चाहते थे अपराधी

उनमें से एक लड़का बोल रहा था, गोली मार दे साले को… मैंने कहा कि भाई साहब मेरा एक छोटा सा बेटा है। मुझे गोली मार कर क्या मिलेगा आपको? आप मेरी कार ले जाइए, जो थोड़े बहुत पैसे हैं, वो ले लिजिए। मैं यहां से पैदल ही चला जाउंगा और किसी से कुछ भी नहीं कहूंगा। इसके बाद उन लोगों ने गन प्वाईंट पर सारे पैसे ले लिए और कहा कि अब चल चेन, अंगूठी, घड़ी और रुपये निकाल। मैंने कहा कि मुझे सोने से एलर्जी है, इसलिए चेन और अंगूठी नहीं पहनता मैं।

इस पर वो बोला कि चल एटीएम, कार्ड से पैसा निकाल। इस पर मैंने कहा कि मैं कार्ड यूज नहीं करता. कहिये तो पेटीएम कर देता हूं। इतना बोलते ही उनमें से एक लड़का मेरा गला दबाने लगा। दूसरे लड़के ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। इसके बाद उन लोगों ने मेरा मोबाइल मांगा, मुझसे लॉक खुलवाया और कुछ देर के बाद बोला कि तुझे जाने दूं या गोली मार दूं ! मैंने अपने छोटे से बच्चे का वास्ता देते हुए बख्शने की विनती की।

आखिर में अतुल ने लिखा कि ये पोस्ट मैं एक पत्रकार के तौर पर नहीं बल्कि एक आदमी के तौर पर लिख रहा हूं।

जहां एक तरफ अतुल के साथ हुई इस घटना पर मीडिया जगत के वरिष्ठ पत्रकार चिंता जता रहा है। तो वहीं दूसरी तरफ भड़ास 4 मीडिया नामक वेबसाइट ने इस पूरी घटना को नाटक बताया है।

रिपोर्ट के मुताबिक जब फेसबुक के जरिए ये बात नोएडा पुलिस तक पहुंची तो थाना-चौकी को टटोला गया लेकिन कहीं ऐसी कोई कंप्लेन दर्ज पाई नहीं गई. जब पुलिस ने अतुल को फोन लगाया तो उन्होंने एफआईआर कराने से इनकार कर दिया। और जब ये पूरी घटना हुई तब भी अतुल ने ना तो सौ नंबर को कॉल किया और ना ही किसी पुलिस अफसर को सूचित किया.

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अपनी रिपोर्ट के जरिए भड़ास 4 मीडिया ने ऐसे अनगिनत सवाल अतुल के द्वारा बयां की गई पूरी घटना पर उठाए हैं। लेकिन ये सवाल तो उठता ही है कि आखिर जब अतुल अग्रवाल के साथ इतनी बड़ी वारदात हो गई तो वो यूपी पुलिस के पास क्यों नहीं जाना चाहते? क्या उन्हें यूपी पुलिस पर यकीन नहीं है या फिर कुछ और ही माज़रा है ?

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