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जब डॉ आंबेडकर ने कहा था ‘हम अब किसी भी हाल में हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं रह सकते’

जानिए बाबा साहब ने अपनी गोल्डन जुबली कार्यक्रम में अछूतों को क्या करने के लिए कहा था ? क्यों एक क्रांति की बात कर रहे थे बाबा साहब ?

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14 अक्टूबर 1956 को Dr Ambedkar ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। (आर्ट-लोकेश पूजा)

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26 अप्रैल 1942 को बाबा साहेब की 50वीं जयंती के मौक़े पर उनके समर्थकों ने मुंबई के कामगार मैदान में भव्य आयोजन किया था जिसमें 10 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने शिरकत की थी। इसी कार्यक्रम में बाबा साहब ने कहा था कि मैं मैं अपना जन्मदिन नहीं मनवाना चाहता।

कांग्रेस और अंग्रेज़ों को ललकारा

मंच से उन्होंने अंग्रेज़ों और कांग्रेस को ललकारते हुए कहा था ‘ब्रिटिश हुकूमत ने हमारे साथ धोखा किया है क्रिप्स मिशन का उद्देश्य ब्रिटिश लोगों को विश्वयुद्ध से हो रही समस्याओं से निकलने के लिए कांग्रेस और मुस्लिम लीग का साथ लिया जाये। दोनों की माँग मान ली जिसका मतलब है किसी को कुछ नहीं देंगे। इस बार तो दलित वर्ग के लोग इस संकट से बच गए लेकिन कभी भी ये संकट वापस आ सकता है इसलिए  एक्शन के लिए तैयार रहना है। एक्शन किस तरह से होगा ये मैं नहीं जानता। संवैधानिक होगा? असंवैधानिक होगा? शांतिपूर्ण होगा? हिंसक होगा? ये मैं नहीं जानता। हमें अपने विकल्पों की तलाश जारी रखनी है कि फिर से संविधान सभा बनेगी लेकिन आपका स्थान उसके अंदर नहीं होगा। ये आपको तय करना है कि अपने वैधानिक हक़ को पाने के लिए आप क्या करेंगे, इसलिए आंदोलन के लिए तैयार रहें।

कांग्रेस की दोहरी नीति पर किया हमला

बाबा साहब ने कहा था ‘यदि आप (कांग्रेस) स्वराज के लिए लड़ रहे हैं तो मैं आपके साथ आने को तैयार हूँ। मैं आपको आश्वस्त कराना चाहता हूँ कि मैं आपसे बेहतर लड़ूँगा ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़। लेकिन एक शर्त रखना चाहता हूँ कि मुझे बताइए जब आपका स्वराज आएगा, मुझे बताइए उसमें हमारा शेयर क्या होगा ? अगर ये आप नहीं बताना चाहते हैं और पीठ पीछे से ब्रिटिश हुकूमत से हाथ मिलाना चाहते हैं तो भाड़ में जाओ।’

#BahujanHistoryOnTheShudra (Photo-Internet)

‘अब हम हिंदू समाज का हिस्सा नहीं रह सकते’

डॉ आंबेडकर ने सख्त शब्दों में हिंदुओं को चेताते हुए कहा था ‘जब हमने अपने पब्लिक करियर की शुरुआत की, तब हम लंबे वक़्त तक ये मानते थे कि अच्छा हो या बुरा, हम हिंदू समाज के ही अंग हैं। हिंदू समाज की बुराइयों को ख़त्म करके समानता के सिद्धांत के आधार पर डिप्रेस्ड क्लास के लोगों को उसमें शामिल कर देंगे। इसी मक़सद से हमने महाड़ आंदोलन चलाया, इसी उद्देश्य से कालाराम मंदिर में प्रवेश आंदोलन चलाया, इसी उद्देश्य से मनुस्मृति का दहन किया और उसी उद्देश्य से अछूतों का जनेऊ संस्कार कराया। लेकिन अनुभव ने मुझे बेहतर शिक्षा दी। आज मैं पूर्णत: आश्वस्त हूँ कि डिप्रेस्ड क्लास के लिए हिंदुओं में समानता की कोई अवधारणा नहीं है। क्योंकि हिंदू धर्म असमानता की बुनियाद पर टिका हुआ है। अब हम किसी भी हाल में हिंदू समाज का अंग नहीं रह सकते। किसी भी परिस्थिति में हम हिंदू समाज का अंग नहीं रह सकते। हम इस देश में सरकार में हिस्सेदार बनना चाहते हैं, हम राजनीतिक शक्तियों का बँटवारा चाहते हैं। हमारे राजनीतिक अधिकार, हिंदुओं के राजनीतिक अधिकारों से अलग माने जाने चाहिए। यदि हिंदू हमारे इन अधिकारों को मानने के लिए तैयार हैं तब हम देश की मुक्ति के इस साझा संघर्ष में साथ देने के लिए तैयार हैं।’

‘नायक पूजा बंद होनी चाहिए’

बाबा साहब अपनी जयंती ना मनाने की अपील करते हुए कहते हैं ‘विगत 15 दिनों से आप मेरा जन्मदिन मना रहे हैं, मैं इसमें कभी शामिल नहीं हुआ। मैंने सदैव इसका विरोध किया है। अब आप मेरे जन्मदिन की गोल्डन जुबली मना रहे हैं, अब बहुत हो गया। इसके बाद कोई भी समारोह मेरे जन्म दिन के अवसर पर ना किया जाए। क्योंकि नेताओं के प्रति अति-आग्रह जनता के आत्मविश्वास को कम कर देता है। हिंदू समाज का निरंतर पतन क्यों हुआ? क्योंकि ये अवतारवाद के सिद्धांत में विश्वास रखते थे। अवतारवाद ने मनुष्य को शिथिल कर दिया। संकट पर लोग सोचते हैं कि देवता आएँगे और हमारा उद्धार करेंगे। इस सिद्धांत को नहीं मानना है क्योंकि आप इससे अपंग हो जाएँगे। आपकी मुक्ति आपके प्रयासों के द्वारा ही होगी जो आपके हाथों में है।’

‘अछूतों को हक़ नहीं मिला तो विद्रोह करेंगे’

बाबा साहब अंग्रेजों को ललकारते हुए कहते हैं ‘ब्रिटिश हुकूमत को ये याद रखना चाहिए कि सत्ता के हस्तांतरण के समय डिप्रेस्ड क्लास के लोगों को पर्याप्त गारंटी मिले। अगर अंग्रेज़ ऐसा नहीं करेंगे तो डिप्रेस्ड क्लास के लोग हर संभव तरीक़े से ब्रिटिश हुकूमत का विरोध करेंगे, उनसे लड़ेंगे। अगर हिंदू हमें ये गारंटी देते हैं कि हमें अधिकार मिलेगा तो हम उनके साथ मिलकर इस साझा संघर्ष को आगे बढ़ाएँगे और ब्रिटिश हुकूमत के ख़िलाफ़ लड़ेंगे।’

प्रो रतन लाल के साथ आंबेडकरनामा का 11वां एपिसोड देखने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

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