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चोरी-चकारी की जगह ‘चोरी-चमारी’ : क्यों भारत में लोग जातिवादी कमेंट करने से नहीं घबराते ?

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भारत में जातिवाद इस तरह से लोगों की जिंदगी में घुल-मिल गया है कि कई लोगों को जातिवादी हरकत करने या ताना देने में कोई हिचकिचाहट नहीं होती। उन्हें टोकें तो कह देते हैं कि मेरा वो मतलब नहीं था। हम अक्सर अपने आसपास लोगों को जातिवादी कमेंट करते हुए या फिर किसी जाति के नाम को गाली या ताने की तरह इस्तेमाल करते हुए देखते हैं।

सोशल मीडिया पर आये कई वीडियो 

Tathagat Live के फाउंडर Anjul Bamhrolia ने अपने ट्विटर हैंडल पर ऐसे ही कुछ वीडियो क्लिप शेयर की हैं जिसमें जाति के नाम पर कुछ भी अनाप-शनाप बोला जा रहा है। अंजुल की ओर से शेयर की गई एक वीडियो क्लिप में Magnet Brains नाम की ऑनलाइन क्लास चलाने वाली संस्था की एक टीचर ‘चोरी-चमारी’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए सुनी जा सकती है। जब अंजुल जैसे लोगों ने इसे लेकर आपत्ति जताई तो चैनल ने वीडियो को प्राइवेट कर लिया। 

मशहूर हस्तियां भी पीछे नहीं हैं 

भारत में चमार, भंगी या कंजर जैसी जातियों के नाम को एक गाली की तरह इस्तेमाल करना आम बात हो गई है। लोगों को घरों से ही ऐसी शिक्षा मिलती है और वो अन्य जातियों के प्रति इतना घटिया नज़रिया रखते हैं। इस मामले में मशहूर हस्तियां भी पीछे नहीं हैं। सलमान खान से लेकर शिल्पा शेट्टी और युवराज सिंह से लेकर मुनमुन दत्ता तक कई प्रमुख हस्तियां जातियों के नाम पर बेहूदगी कर चुके हैं।

अंजुल ने एक और वीडियो क्लिप शेयर की जिसमें मशहूर अभिनेता अरशद वारसी के साथ अभिनेता राजपाल यादव भी अपने डायलॉग में ‘चोरी-चमारी’ बोल रहे हैं। 2009 में आई फिल्म ‘एक से भले दो’ के इस सीन को फिल्माने से लेकर डायलॉग लिखने तक, सेंसर बोर्ड की ओर से पास करने से लेकर सिनेमा घरों में रिलीज़ तक, क्यों किसी ने आपत्ति नहीं जताई?

चोरी-चकारी की जगह चोरी-चमारी क्यों ?

हिंदी में चोरी-चकारी शब्द का इस्तेमाल होता है लेकिन बहुत से लोग चोरी-चमारी शब्द बोलते हुए नज़र आ जाते हैं। ऐसे लोगों को ये तक अंदाज़ा नहीं रहता कि वो एक जाति को लेकर कितनी घटिया भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं और ऐसा करना एक दंडनीय अपराध है। ऐसे लोगों पर जातिसूचक शब्द बोलने के लिए एस-एसटी एक्ट के तहत कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।

द शूद्र से बात करते हुए Tathagat Live के फाउंडर Anjul Bamhrolia कहते हैं ‘चोरी-चकारी शब्द की जगह चोरी-चमारी जैसे शब्दों का इस्तेमाल दिखाता है कि भारत में कुछ जातियों को लेकर लोगों का दृष्टिकोण कितना तंग है। लोग बेधड़क होकर ऐसे जातिवादी कमेंट करते हैं, जो उन जाति के लोगों को अपमानित करने वाला है जो इनसे ताल्लुक रखते हैं। ये पीड़ित जातियों के साथ मानसिक शोषण करने जैसा है।’

हम क्यों इतने असंवेदनशील हैं ?

भारत एक जाति प्रधान देश है और यहां लोगों की रगो में लहू के साथ-साथ जाति भी दौड़ती है। अक्सर घरों से ही बच्चों को ये सिखा दिया जाता है कि किसके साथ खेलना है, किससे बात करनी है और किससे नहीं। जातिवाद का पहला पाठ बच्चे अपने घरों से ही सीखते हैं। भारतीय अपने घरों में भी इस तरह की जातिवादी गालियों और जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं और उनके बच्चे यही सब देखते-सुनते हुए सीख जाते हैं।

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