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राजस्थान : अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी से तंग आकर दलित नाबालिग लड़की ने की सुसाइड

महीने भर बाद भी पीड़िता का परिवार इंसाफ़ के लिए भटक रहा है

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(सांकेतिक तस्वीर)

राजस्थान के दौसा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि एक नाबालिग दलित लड़की ने रेप और ब्लैकमेलिंग से तंग आकर ख़ुदकुशी कर ली लेकिन महीने भर बाद भी पीड़िता का परिवार इंसाफ़ के लिए भटक रहा है। मामला दौसा के महवा थानाक्षेत्र का है। 

अश्लील वीडियो वायरल कर ब्लैकमेलिंग का आरोप 

पीड़िता के परिवार ने दौसा के एडिशनल एसपी को भेजे शिकायत पत्र में बताया है कि ‘नरेश कोली, तुलसी कोली, विद्या कोली, धर्मवीर कोली, कमलेश कोली और शनि कोली उनकी बेटी का अश्लील वीडियो बनाकर उसे 6 महीने से ब्लैकमेल कर रहे थे। नरेश कोली ग़लत काम करने के लिए मजबूर करता था।’ पीड़िता और सभी आरोपी दलित समुदाय से हैं।

पीड़िता ने फाँसी लगाकर दे दी जान 

परिवार की शिकायत के मुताबिक़ नाबालिग पीड़िता ने ब्लैकमेलिंग से तंग आकर 27 जुलाई को फाँसी लगाकर सुसाइड कर ली थी। परिवार ने रेप का आरोप लगाया है हालाँकि जिस सुसाइड नोट को पीड़िता का बताया जा रहा है, उसमें फोटो वायरल करने की धमकी का तो ज़िक्र है लेकिन रेप या गैंगरेप की बात नहीं लिखी है।

पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लगाया आरोप 

शिकायत में परिवार ने दौसा पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक़ पीड़िता और उसकी माँ शिकायत लेकर थाने गए थे लेकिन पुलिस ने राज़ीनामा करवा कर घर भेज दिया। पीड़िता के भाई ने हमें फ़ोन पर बताया ‘हम पुलिस से मदद माँग रहे हैं लेकिन महीने भर बाद भी सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है। हम कुछ कहते हैं तो आरोपी हमारे साथ मारपीट करते हैं’

पुलिस का क्या कहना है ?

द शूद्र की टीम ने इस बारे में इंस्वेटिगेशन ऑफ़िसर बुद्धि प्रसाद से फ़ोन पर बात की। उन्होंने कहा ‘मामले की जाँच चल रही है और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पीड़िता ने सुसाइड लेटर में रेप का ज़िक्र नहीं किया है और अभी इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि वो चिट्ठी पीड़िता ने ही लिखी थी। पीड़िता के सुसाइड लेटर के आधार पर हम सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर सकते, जब पुलिस की जाँच में ये प्रमाणित हो जाएगा कि आरोप सही हैं तो बाक़ी की गिरफ़्तारी होगी।’

महीने भर से क्या कर रही है पुलिस ?

लेकिन अब सवाल उठता है कि मामले को एक महीने से भी ज़्यादा हो गया लेकिन अभी तक ना ही पुलिस मेडिकल रिपोर्ट पेश कर पाई है और ना ये ही पता लगा पाई है कि सुसाइड लेटर पीड़िता ने ख़ुद लिखा था या नहीं? आरोप संगीन है लेकिन पुलिस महीने भर बाद भी मामले को सुलझा नहीं पाई है। ऐसे में सवाल उठता है कि मामले में सच-झूठ की छानबीन करने वाली पुलिस आख़िर कब किसी नतीजे पर पहुँचेगी ?

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